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    संसद में प्रधानमंत्री की बात: ‘मंथन से अमृत निकलेगा’, संशोधन पर सहयोग की अपील

    नई दिल्ली | संसद के विशेष सत्र के दौरान आज लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'महिला आरक्षण विधेयक' यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम खुशकिस्मत हैं कि हम इस पल के साक्षी बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि इस मंथन से अमृत निकलेगा और ये मंथन देश की दिशा और दशा तय करेगी। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के लिए महत्वपूर्ण दिन है। यह 20-25 वर्ष पहले हो जाना चाहिए था, समय समय पर इसमें सुधार होते रहते। सदन के सभी साथियों को यह अवसर मिला है। 

    हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं- पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं। मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते। हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं। हमारी हजार वर्ष की विकास यात्रा रही है।

    जो विरोध करेंगे उसे कीतम चुकानी पड़ेगी- पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि राजनीतिक जीवन में जो लोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्हें यह मान कर चलना पड़ेगा कि पिछले 25 से 30 साल में ग्रासरूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33 फीसदी का नहीं, बल्कि वहां भी आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं। इसलिए जो आज विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। राजनीतिक समझदारी इसी में है कि हम ग्रासरूट लेवल पर महिलाओं की जो राजनीतिक लीडरशिप खड़ी हुई है, उसे हमें संदर्भ में लेना पड़ेगा।

    मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है-पीएम मोदी

    हमारे मुलायम सिंह जी और उनके परिवार वाले एक बात चला रहे हैं। आप महिलाओं की समझदारी पर भरोसा करो। उन्हें निर्णय लेने दो कि किस वर्ग को आरक्षण देना है, किस वर्ग को नहीं। उन्हें आने तो दो। मैं अति-पिछड़े समाज से आता हूं। मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है। यह संविधान की ही ताकत है कि जिसने मुझे यहां तक आने का मौका दिया है। मैं संविधान निर्माताओं का ऋणी हूं।इतना बड़ा सामर्थ्य है, उसे हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं। उनके जुड़ने से सामर्थ्य बढ़ने वाला है। इसे राजनीति के तराजू से मत तोलिए। इस मामले को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में हमारी नागरिक शक्ति को एक खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है। आज पूरा देश और नारी शक्ति यह निर्णय तो देखेगी लेकिन इससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

    2023 में सभी ने अधिनियम को स्वीकार किया था- पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना। उसमें कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे। यह अच्छी चीज है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसे रोकना है। जो लोग यहां आबादी का विषय उठाते हैं, अमित शाह अपने भाषण में इसका जिक्र करेंगे कि हमने जनगणना के लिए क्या-क्या किया? यह बातें हम रखेंगे। लेकिन पिछले दिनों जब हम 2023 में चर्चा कर रहे थे, तब इसे जल्दी लागू करने की बात कर रहे थे। लेकिन कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 2029 में यह किया जा सकता है। अब अगर 2029 में यह संभव नहीं होगा, तो हम विश्वास नहीं बना पाएंगे माता-बहनों में कि यह संभव भी है।पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब मैं संगठन का एक कार्यकर्ता था, तब चर्चा होती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं। लेकिन उनमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। हम सुरक्षित हैं,  इसलिए दे दो। इसलिए पंचायत में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए। मैं एक और बात कहता हूं कि जिसने 30 साल पहले जिसने विरोध किया वह राजनीतिक गलियारों से नीचे नहीं गया, लेकिन ग्रास रूट पर आज वहीं बहनें मुखर हैं। लाखों बहनें जो काम कर चुकी हैं वे मुखरित हैं। वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रकि्रया में जोड़ो, जो संसद में होती है।

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