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    सिलीबेरी गेट खोलने की मांग को लेकर ग्रामीणों का उबाल, बड़ी बैठक में बना आंदोलन का माहौल

    सिलीबेरी गेट नहीं खुला तो होगा उग्र आंदोलन, ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

    अलवर। मालाखेड़ा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बालेटा स्थित घसेंडी बाबा मंदिर परिसर में शनिवार को सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरिस्का टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत आने वाले सिलीबेरी नाका (बालेटा रेंज, अकबरपुर) स्थित प्रवेश द्वार को खोलने की मांग को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते गेट नहीं खोला गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

    बालेटा सरपंच हजारीलाल मीणा ने बताया कि सिलीबेरी गेट वर्षों से ग्रामीणों के लिए मुख्य मार्ग रहा है, लेकिन वर्तमान में इसे बंद कर दिया गया है। इस संबंध में कई बार सरिस्का अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन अपरिहार्य होगा।

    बैठक को संबोधित करते हुए मालाखेड़ा नगर पालिका अध्यक्ष हिम्मत चौधरी ने कहा कि यह मार्ग प्राचीन समय से पांडुपोल हनुमान मंदिर के दर्शन के लिए उपयोग में लिया जाता रहा है। गेट बंद होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग रखी कि कम से कम शनिवार और मंगलवार को दोपहिया वाहनों के लिए गेट खोला जाए, अन्यथा बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

    पूर्व सरपंच इंद्र मीणा ने कहा कि प्रशासन को पहले ही कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पांडुपोल की दूरी बालेटा से मात्र 10 किलोमीटर है, जबकि वैकल्पिक मार्ग से करीब 60 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

    भण्डोडी सरपंच जगदीश मीणा ने सरिस्का कर्मचारियों पर लापरवाही और तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों को ही अपने धार्मिक स्थल तक जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द रास्ता नहीं खोला गया तो आंदोलन उग्र हो सकता है।

    महावीर प्रसाद चौधरी ने भी कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई और कहा कि यदि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन की गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई देगी।

    इस संबंध में अकबरपुर रेंज के रेंजर हेमेंद्र सिंह ने बताया कि गेट को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत बंद किया गया है और उच्च स्तर से अनुमति मिलने के बाद ही इसे खोला जा सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों का ज्ञापन अधिकारियों तक भेज दिया गया है।

    बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी मांग दोहराई और प्रशासन से शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई।

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