लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली महकमे में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष (चेयरमैन) डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक बेहद सख्त पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान जहां एक तरफ कई बिजली कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी से काम किया, वहीं कुछ लापरवाह कर्मियों ने सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की। उन्होंने ऐसे दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और मौजूदा ट्रांसफर सीजन में उनका उचित तबादला कर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
संकट के समय मुख्यालय छोड़ने पर मंत्री ने जताई कड़ी आपत्ति
ऊर्जा मंत्री ने पत्र के जरिए चेयरमैन के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने लिखा कि मई के महीने में आए आंधी-तूफान की वजह से राज्य का बिजली ढांचा बुरी तरह चरमरा गया था। इस बेहद चुनौतीपूर्ण समय में 30 मई को बुलाई गई समीक्षा बैठक के दौरान पता चला कि चेयरमैन खुद मुख्यालय से नदारद हैं और आगे भी तीन दिनों तक बाहर रहने वाले हैं। काफी कहने के बाद वे ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए। मंत्री ने इसे जनहित के खिलाफ और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए कहा कि भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए।
उपभोक्ता परिषद की मांग: मनमाने फैसलों पर लगे लगाम, सीएम योगी करें हस्तक्षेप
इस पूरे विवाद के बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने जून महीने से लागू की गई 10 फीसदी ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) शुल्क की वसूली पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन खुद विभागीय मंत्री और नियामक आयोग की बातों को नजरअंदाज कर रहा है, तो वह किसकी सुनेगा? वर्मा ने इस गंभीर संकट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तुरंत दखल देने की अपील की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियामक आयोग पहले ही जून में इस शुल्क को लगाने को गैरकानूनी घोषित कर चुका है। इसके बावजूद कॉर्पोरेशन ने इसे लागू कर दिया, जिसकी भनक खुद ऊर्जा मंत्री को सोशल मीडिया के जरिए लगी। वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन में लगातार मनमाने ढंग से फैसले लिए जा रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
तीन साल पुराने वादे पूरे न होने से बिजली कर्मचारियों में भारी आक्रोश
इधर, लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भी अपनी मांगों को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को एक ज्ञापन सौंपा है। समिति ने मार्च 2023 में हुए बिजली आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर की गई सभी दंडात्मक और दमनकारी कार्रवाइयों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ऊर्जा मंत्री की ओर से तीन साल पहले दिए गए निर्देशों पर भी कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अब तक कोई अमल नहीं किया है, जिससे बिजली कर्मियों में भारी असंतोष है। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी, केएस रावत और आरसी पाल सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे।


