More
    HomeबिजनेसGovernment of India ने कहा—पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई फैसला नहीं

    Government of India ने कहा—पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई फैसला नहीं

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि से जुड़ी तमाम खबरों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक करार दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन के दाम बढ़ाने का फिलहाल कोई विचार या प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें अफवाह: केंद्र सरकार

    • सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि जल्द ही ईंधन के दामों में भारी इजाफा हो सकता है। इन खबरों का खंडन करते हुए मंत्रालय ने कहा है कि जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कीमतें स्थिर बनी रहेंगी।
    • क्या था दावा? कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के हवाले से यह बात फैलाई जा रही थी कि विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की भारी वृद्धि हो सकती है।
    • सरकार का पक्ष: मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्टों का उद्देश्य केवल आम जनता के बीच भय और भ्रम पैदा करना है।

    "भारत में पिछले 4 साल से कीमतें स्थिर"

    सरकार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि भारत संभवतः विश्व का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश है, जहाँ पिछले चार वर्षों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज नहीं की गई है। मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम बढ़ने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और सरकार ने मिलकर आम आदमी पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया है।

    ईंधन की कीमतें तय होने के मुख्य आधार

    आम नागरिकों की जानकारी के लिए मंत्रालय ने उन कारकों को भी स्पष्ट किया है जो पेट्रोल और डीजल के रेट तय करते हैं:

    • कच्चा तेल (क्रूड ऑयल): अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर घरेलू दामों पर पड़ता है।
    • रुपये की विनिमय दर: चूँकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती या कमजोरी लागत को प्रभावित करती है।
    • टैक्स और शुल्क: केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला वैट (VAT) कीमतों का एक बड़ा हिस्सा होते हैं। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें अलग होने के कारण हर शहर में भाव भिन्न होते हैं।
    • रिफाइनिंग और लॉजिस्टिक्स: कच्चे तेल को साफ करने (रिफाइन करने) का खर्च और उसे देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाने की लागत भी अंतिम कीमत में शामिल होती है।
    • डिमांड और सप्लाई: वैश्विक और घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता और मांग के बीच का संतुलन भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का कारण बनता है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here