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    Homeराज्ययूपीकाम और पढ़ाई का संतुलन बनाकर छात्रों ने रचा इतिहास

    काम और पढ़ाई का संतुलन बनाकर छात्रों ने रचा इतिहास

    यूपी बोर्ड 2026: संघर्ष और स्वावलंबन की जीत, पढ़ाई के साथ हुनर निखारकर छात्र बने मिसाल

    आगरा| उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) द्वारा आयोजित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित कर दिए गए। इस वर्ष के परिणाम केवल अंकों की दौड़ तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन 'साइलेंट हीरोज' की कहानियाँ भी सामने आईं जिन्होंने आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई और रोजगार का अद्भुत संतुलन बिठाया।

    इन छात्रों की सफलता यह स्पष्ट करती है कि आज की युवा पीढ़ी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल (Skill) और आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रही है।

    विशेषज्ञों की राय: कौशल आधारित शिक्षा का बढ़ता महत्व

    शिक्षाविदों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल अंक सफलता का पैमाना नहीं हो सकते। व्यवहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. पूनम तिवारी के अनुसार, जो छात्र कम उम्र में पढ़ाई के साथ-साथ किसी कौशल या रोजगार से जुड़ते हैं, उनमें जिम्मेदारी की भावना और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता अन्य छात्रों की तुलना में कहीं अधिक विकसित होती है। ऐसे छात्र भविष्य की चुनौतियों और पेशेवर जगत के लिए पहले से तैयार रहते हैं।


    संघर्ष और सफलता की तीन प्रेरणादायक कहानियाँ

    1. यश राजपूत: स्केचिंग और फैक्टरी के काम के बीच हासिल की सफलता

    इंटरमीडिएट की परीक्षा में 59% अंक प्राप्त करने वाले यश राजपूत के लिए यह प्रतिशत महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके कठिन परिश्रम का प्रमाण है। यश के पिता, अमित राजपूत, स्क्रीन पेंटिंग (छपाई) का काम करते हैं और माँ अंजू राजपूत गृहिणी हैं। यश ने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और परिवार की मदद के लिए दोहरे मोर्चे पर काम किया:

    • कला से रोजगार: यश एक बेहतरीन स्केच आर्टिस्ट हैं। वह लोगों के स्केच बनाकर अपनी पॉकेट मनी और पढ़ाई का खर्च निकालते हैं।

    • औद्योगिक अनुभव: अपनी कला के साथ-साथ वह एक जूता फैक्टरी में भी कार्य करते हैं। यश का मानना है कि काम चाहे छोटा हो या बड़ा, वह इंसान को आत्मनिर्भर बनाता है।

    2. दशरथ कुमार: इवेंट मैनेजमेंट और कंप्यूटर एडिटिंग में भी दिखाया दम

    दशरथ कुमार ने इंटरमीडिएट में 71% अंक हासिल कर यह साबित किया कि यदि समय का प्रबंधन (Time Management) सही हो, तो नौकरी के साथ भी बेहतर परिणाम लाए जा सकते हैं।

    • पारिवारिक पृष्ठभूमि: दशरथ के पिता मुन्नालाल रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

    • करियर और कौशल: दशरथ वर्तमान में एक इवेंट कंपनी में कार्यरत हैं। काम के साथ-साथ उन्होंने कंप्यूटर में एमएस एक्सेल और वीडियो एडिटिंग जैसे आधुनिक कौशल भी सीखे हैं, जिनका उपयोग वह अपने पेशेवर जीवन में कर रहे हैं। भविष्य में वह बीबीए (BBA) कर मैनेजमेंट के क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहते हैं।

    3. राजा सागर: पिता की बीमारी के बाद संभाली घर की कमान और लाए 79% अंक

    राजा सागर की कहानी अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी है। इंटरमीडिएट में 79% अंक लाने वाले राजा के पिता ओमप्रकाश तीन साल पहले पैरालिसिस (लकवा) का शिकार हो गए थे, जिसके बाद से घर की पूरी जिम्मेदारी राजा के कंधों पर आ गई।

    • जन सेवा केंद्र से सहारा: राजा ने हार मानने के बजाय कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक सीखी और एक जन सेवा केंद्र का संचालन शुरू किया। इससे न केवल उनके परिवार का खर्च चल रहा है, बल्कि उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।

    • भविष्य का लक्ष्य: राजा अब चिकित्सा के क्षेत्र में जाना चाहते हैं और उनका अगला लक्ष्य नीट (NEET) की परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनना है, ताकि वह अपने पिता जैसे मरीजों की सेवा कर सकें।

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