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    क्या आज भी पृथ्वी पर हैं Hanuman? Ramayana के बाद की रहस्यमयी कथा

    रामायण के महायुद्ध और प्रभु श्री राम के पृथ्वी लोक से प्रस्थान के बाद हनुमान जी की नियति क्या रही, यह जिज्ञासा हर रामभक्त के मन में होती है। हनुमान जी को 'अष्टचिरंजीवी' में से एक माना जाता है, जिसका अर्थ है कि वे काल की सीमाओं से परे आज भी इसी धरा पर विद्यमान हैं।

    यहाँ हनुमान जी की अमरता और रामायण के बाद उनके विभिन्न युगों में दर्शन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:


    1. विदाई का वह भावुक क्षण: चिरंजीवी होने का आदेश

    जब भगवान श्री राम का अवतार कार्य पूर्ण हुआ और वे सरयू नदी के मार्ग से अपने परमधाम (वैकुंठ) जाने लगे, तब उन्होंने अपने प्रिय भक्त हनुमान को पास बुलाया। हनुमान जी भी साथ जाना चाहते थे, लेकिन श्री राम ने उन्हें एक अत्यंत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा।

    • प्रभु का आदेश: "हे हनुमान! जब तक इस पृथ्वी पर मेरी कथा और मेरा नाम जीवित रहेगा, तब तक तुम यहीं रहकर धर्म और मेरे भक्तों की रक्षा करोगे।"

    • आध्यात्मिक अर्थ: हनुमान जी की अमरता केवल एक वरदान नहीं, बल्कि भक्ति की निरंतरता का प्रतीक है। वे इस बात का प्रमाण हैं कि प्रभु के चले जाने के बाद भी उनकी कृपा और शक्ति (हनुमान के रूप में) हमेशा भक्तों के साथ रहती है।


    2. महाभारत काल: भीम और हनुमान का मिलन

    रामायण के हजारों वर्षों बाद द्वापर युग में भी हनुमान जी की उपस्थिति के साक्ष्य मिलते हैं।

    • अहंकार का मर्दन: जब पांडु पुत्र भीम को अपनी शक्ति पर अभिमान हो गया था, तब हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धरकर उनका मार्ग रोका। भीम अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी हनुमान जी की पूंछ तक नहीं हिला पाए।

    • सीख: इस मिलन के माध्यम से हनुमान जी ने भीम को सिखाया कि वास्तविक शक्ति विनम्रता में निहित होती है, अहंकार में नहीं।


    3. कुरुक्षेत्र का युद्ध: अर्जुन के रथ पर वास

    महाभारत के भीषण युद्ध में भी हनुमान जी ने 'धर्म' का साथ दिया।

    • कपिध्वज: भगवान श्रीकृष्ण के सुझाव पर हनुमान जी सूक्ष्म रूप में अर्जुन के रथ के ध्वज (झंडे) पर विराजमान हुए।

    • रथ की रक्षा: युद्ध समाप्त होने के बाद जब हनुमान जी ध्वज से उतरे और श्रीकृष्ण रथ से नीचे आए, तब वह रथ तुरंत भस्म हो गया। तब अर्जुन को ज्ञात हुआ कि हनुमान जी की उपस्थिति के कारण ही भीष्म, द्रोण और कर्ण के दिव्यास्त्र उस रथ का बाल भी बांका नहीं कर पाए थे।


    4. वर्तमान युग और जनश्रुतियां

    कलयुग में हनुमान जी को 'जाग्रत देवता' माना जाता है। उनके निवास और उपस्थिति के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं:

    • गंधमादन पर्वत: पुराणों के अनुसार, वे हिमालय के गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, जहां कलियुग के प्रभाव से दूर वे राम नाम के जप में लीन रहते हैं।

    • अदृश्य उपस्थिति: ऐसी मान्यता है कि जहाँ कहीं भी रामकथा का वाचन पूरी श्रद्धा से होता है, वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में अवश्य उपस्थित रहते हैं। इसीलिए कथा के दौरान 'हनुमान जी के आसन' के लिए एक उच्च स्थान खाली छोड़ने की परंपरा है।

    • अनुभव और विश्वास: कई साधु-संतों (जैसे तुलसीदास जी) ने हनुमान जी के दर्शन और उनकी प्रेरणा से ग्रंथ लिखने का दावा किया है। आज भी भक्तों का विश्वास है कि 'हनुमान चालीसा' का पाठ कठिन समय में अदृश्य ढाल का काम करता है।

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