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    आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.8 करने की उठी मांग

    पुणे: 8वें वेतन आयोग के समक्ष केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग, न्यूनतम वेतन 65 हजार और फिटमेंट फैक्टर 3.8 करने का प्रस्ताव

    केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य और उनके वेतन ढांचे को लेकर महाराष्ट्र के पुणे में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक में महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और आयोग के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात कर कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए दूरगामी प्रस्ताव सौंपे। संगठन की ओर से प्रमुखता से यह मांग रखी गई है कि वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 65,000 रुपये किया जाए और फिटमेंट फैक्टर को 3.8 के स्तर पर लाया जाए। लगभग आधे घंटे तक चली इस चर्चा में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और कार्यस्थल की परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में सरकारी सेवकों को उचित राहत मिल सके।

    परिवार की नई परिभाषा और न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी का आधार

    संगठन ने आयोग के समक्ष तर्क दिया है कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए परिवार के सदस्यों की जो संख्या मानी जाती है, उसे बदला जाना चाहिए। अब कर्मचारी, जीवनसाथी, दो बच्चे और माता-पिता को मिलाकर परिवार की गणना तीन के बजाय पांच सदस्यों के आधार पर करने का सुझाव दिया गया है। इसी यथार्थवादी आकलन और एक्रोयड फॉर्मूले को आधार बनाकर एंट्री-लेवल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 65,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रतिनिधियों का मानना है कि राजकोषीय संतुलन को बनाए रखते हुए यदि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.8 कर दिया जाता है, तो इससे कर्मचारियों के जीवन स्तर में सार्थक सुधार होगा और वे अपनी बुनियादी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।

    भत्तों में संशोधन और करियर प्रोग्रेशन स्कीम पर विशेष जोर

    वेतन वृद्धि के साथ-साथ भत्तों की संरचना में भी बड़े बदलावों की मांग की गई है, जिसमें महंगाई भत्ते के 50 प्रतिशत तक पहुँचने पर उसे स्वतः मूल वेतन में शामिल करने का प्रस्ताव शामिल है। मकान किराया भत्ते को शहरों की श्रेणी के आधार पर पुनर्गठित करने और यात्रा भत्ते को ढाई गुना तक बढ़ाने का आग्रह किया गया है ताकि परिवहन लागत में हुई वृद्धि की भरपाई हो सके। इसके अतिरिक्त, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों में बढ़ोतरी और शिक्षकों के लिए नई करियर प्रोग्रेशन स्कीम लागू करने की बात कही गई है। संगठन ने वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को भी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है ताकि कर्मचारियों की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।

    पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार की मांग

    इस बैठक का एक सबसे बड़ा केंद्र बिंदु पेंशन सुधार रहा है, जिसमें देश भर के लाखों कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की पुरजोर वकालत की गई है। संगठन ने सुझाव दिया है कि यदि एनपीएस जारी रहता है, तो उसमें कम से कम 10 प्रतिशत रिटर्न की गारंटी और नियोक्ता का अंशदान बढ़ाकर साढ़े अठारह प्रतिशत किया जाना चाहिए। साथ ही, वरिष्ठ पेंशनभोगियों को मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन की आयु सीमा को 80 वर्ष से घटाकर 75 वर्ष करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इन मांगों के माध्यम से कर्मचारियों की बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं और मुद्रास्फीति के प्रभावों को संतुलित करने का प्रयास किया गया है, जिसकी परिणति अब आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

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