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    पंजाब में हाई अलर्ट, ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सुरक्षा कड़ी

    चंडीगढ़: 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ से ठीक पहले पंजाब में दो सैन्य ठिकानों के पास हुए संदिग्ध धमाकों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जालंधर में बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय और अमृतसर के खासा आर्मी कैंप के पास हुए इन विस्फोटों के बाद पूरे राज्य में 'हाई अलर्ट' जारी कर दिया गया है। एनआईए (NIA) और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि क्या इन धमाकों का उद्देश्य 'ऑपरेशन सिंदूर' की सालगिरह पर किसी बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देना था। हालांकि अभी तक कोई सीधा संबंध पुख्ता नहीं हुआ है, लेकिन संवेदनशील सीमावर्ती राज्य होने के कारण सुरक्षा मूल्यांकन में इस पहलू को गंभीरता से शामिल किया गया है।

    सीमावर्ती जिलों में सेना और पुलिस का संयुक्त तलाशी अभियान

    धमाकों के बाद पठानकोट, अमृतसर, फिरोजपुर और गुरदासपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पठानकोट में एसएसपी दलजिंदर सिंह ढिल्लो के नेतृत्व में पुलिस और सेना ने पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ने वाले अंतरराज्यीय नाकों पर सुरक्षा बल बढ़ा दिए गए हैं और हर वाहन की बारीकी से जांच की जा रही है। विशेष रूप से रेलवे स्टेशनों और अति-संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है ताकि सीमा पार से होने वाली किसी भी संदिग्ध हलचल या घुसपैठ को तुरंत नाकाम किया जा सके।

    राजधानी चंडीगढ़ और पुलिस मुख्यालय की सुरक्षा अभेद्य

    पंजाब में हुए दोहरे ब्लास्ट के असर से राजधानी चंडीगढ़ भी अछूता नहीं है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट पर अतिरिक्त बल तैनात कर लोहे के ऊंचे अवरोधक (बैरिकेड्स) लगाए गए हैं ताकि बाहरी क्षेत्र से कोई विस्फोटक परिसर के अंदर न फेंका जा सके। राज्यपाल आवास और चंडीगढ़ प्रशासन के कार्यालयों की निकटता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहतीं। पुलिस मुख्यालय में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन तलाशी ली जा रही है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

    आईएसआई और खालिस्तानी-गैंगस्टर गठजोड़ की नई चुनौती

    पंजाब में हालिया घटनाओं ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और विदेशी धरती पर बैठे खालिस्तानी आतंकियों के बीच बढ़ते गठजोड़ की ओर इशारा किया है। लखबीर लंडा और रंजीत नीटा जैसे हैंडलर्स द्वारा ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, गैंगस्टर और आतंकियों का यह त्रिकोणीय नेटवर्क राज्य की शांति भंग करने के लिए सुनियोजित तरीके से काम कर रहा है। हालांकि सुरक्षा बलों ने ड्रोन विरोधी तकनीक और मजबूत स्थानीय खुफिया तंत्र के जरिए कई बड़ी साजिशों को विफल किया है, लेकिन सीमा पार से मिल रही लगातार चुनौतियों ने सतर्कता को उच्चतम स्तर पर बनाए रखने के लिए मजबूर कर दिया है।

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