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    गरीबी से टूटे दंपती ने उठाया खौफनाक कदम, बेटे को घर में मिले शव

    लुधियाना: पंजाब के लुधियाना जिले के पमाल गांव से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक वृद्ध दंपती ने आर्थिक तंगी और बीमारी से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह दुखद वाकया मंगलवार की देर रात घटित हुआ, जिसका खुलासा तब हुआ जब निजी अस्पताल में कार्यरत उनका पुत्र अपनी शिफ्ट खत्म कर घर वापस लौटा। घर के भीतर से एक मार्मिक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें दंपती ने अपनी नियति और संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए लिखा है कि गरीबी में जन्म लेने के बाद अब वे उसी अभावपूर्ण स्थिति में इस संसार से विदा ले रहे हैं। मृतकों की पहचान गुरमीत सिंह और उनकी पत्नी नरिंदर कौर के रूप में हुई है, जिनके इस आत्मघाती कदम ने पूरे गांव को शोक संतप्त कर दिया है।

    पुत्र के घर लौटते ही हुआ घटना का हृदयविदारक खुलासा

    दंपती का पुत्र जो शहर के ही एक अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहा था, देर रात जब घर पहुंचा तो उसे अनहोनी का आभास हुआ। घर लौटने के दौरान उसने कई बार अपने माता-पिता से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन फोन और संदेशों का कोई उत्तर न मिलने पर उसकी चिंता बढ़ गई। जैसे ही वह घर के भीतर दाखिल हुआ, उसे अपने माता-पिता के निर्जीव शरीर पड़े मिले, जिसके बाद उसने तुरंत पुलिस और पड़ोसियों को सूचित किया। सूचना पाकर पहुंची थाना जोधां की पुलिस टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्यों को कब्जे में लेकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवाया।

    बीमारी और आर्थिक संकट के बीच मानसिक अवसाद का साया

    पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्राथमिक जांच से यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि नरिंदर कौर पिछले छह वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थीं, जिसके कारण परिवार पर इलाज का भारी आर्थिक बोझ था। अपनी पत्नी की गिरती सेहत और सीमित संसाधनों के कारण गुरमीत सिंह निरंतर मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे थे। बरामद पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपनी कठिन परिस्थितियों से पूरी तरह टूट चुके थे और उनके इस फैसले के लिए कोई अन्य व्यक्ति या रिश्तेदार जिम्मेदार नहीं है। पत्र के माध्यम से उन्होंने अपने बच्चों से माफी भी मांगी है, जिससे यह साफ होता है कि लंबे समय से चल रही हताशा ने उन्हें इस चरम कदम की ओर धकेला।

    पुलिसिया कार्यवाही और सुसाइड नोट के आधार पर जांच

    पुलिस प्रशासन ने सुसाइड नोट को मुख्य साक्ष्य मानते हुए जांच की दिशा तय की है और इसमें किसी भी बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता नहीं पाई गई है। थाना प्रभारी ने बताया कि दंपती ने अपनी मर्जी से यह कदम उठाया है, इसलिए फिलहाल किसी को नामजद नहीं किया गया है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों और समय की पुष्टि की जा सके। यह घटना समाज में बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य और मध्यमवर्गीय परिवारों पर बढ़ते चिकित्सा खर्च के दबाव जैसे गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करती है, जो समय रहते सहायता न मिलने पर ऐसे दुखद अंत का कारण बनते हैं।

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