खैरथल में जन आंदोलन समर्थन में भाजपा पर बरसे जितेंद्र सिंह और टीकाराम जूली
खैरथल-तिजारा। जितेंद्र सिंह ने कहा कि खैरथल-तिजारा जिले के नाम और मुख्यालय के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वे गुरुवार को जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति द्वारा पिछले 273 दिनों से चल रहे धरने को समर्थन देने खैरथल पहुंचे थे।
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति अब भू-माफियाओं जैसी हो गई है। कभी जिला मुख्यालय भिवाड़ी ले जाने की बात की जाती है तो कभी कोटकासिम की चर्चा कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद के पीछे जमीनों के दाम बढ़ाने का खेल चल रहा है।
जितेंद्र सिंह ने ईआरसीपी योजना को “झूठ का पुलिंदा” बताते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर इस परियोजना को लटका रही है। उन्होंने कहा कि पुराना अलवर जिला डार्क जोन में पहुंच चुका है और सरकार को चंबल तथा यमुना का पानी लाने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने खैरथल क्षेत्र के लोगों के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि अलवर, बहरोड़-कोटपूतली और खैरथल-तिजारा जिले की पूरी कांग्रेस इस आंदोलन के साथ खड़ी है।
सभा को संबोधित करते हुए टीकाराम जुली ने कहा कि सरकार का काम लोगों को बसाना होता है, उजाड़ना नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनाए गए जिलों को खत्म करने पर तुली हुई है।
जूली ने भाजपा सरकार पर विकास, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जनता को मूल मुद्दों से दूर कर रही है। उन्होंने भाजपा नेताओं को “प्रॉपर्टी डीलर” बताते हुए कहा कि सरकार खैरथल-तिजारा की जनता के साथ धोखा कर रही है।
उन्होंने कहा कि 273 दिनों से आंदोलन जारी रहने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह अब केवल आंदोलन नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन चुका है और इसकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी।
सभा में उपस्थित लोगों ने खैरथल का नाम किसी भी स्थिति में नहीं बदलने का संकल्प लिया। जूली ने कहा कि खैरथल और तपोस्थली भर्तृहरि दोनों का अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है और नाम परिवर्तन से आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय खैरथल-तिजारा जिले की घोषणा के साथ ही कलेक्टर और एसपी की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था शुरू कर दी गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार अब भी व्यवस्थाओं को लेकर उलझन में है।
इस अवसर पर ललित यादव, दीपचंद खैरिया, शकुंतला रावत, प्रकाश गंगावत सहित कई जनप्रतिनिधि और संघर्ष समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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