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    अस्पताल में चार मौतों के बाद बवाल, परिजनों ने शव लेने से किया इंकार

    कोटा। शहर के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। मेडिकल कॉलेज के बाद अब जेके लोन अस्पताल में भी दो प्रसूताओं की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। लगातार हो रही इन मौतों से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव लेने से मना कर दिया है।

    मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग

    घटना की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष रविंद्र त्यागी सहित अन्य नेता मौके पर पहुंचे और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मृत महिलाओं के परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की भारी अनदेखी के कारण एक के बाद एक मौतें हो रही हैं, लेकिन प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है।

    संक्रमण और किडनी फेल होने की आशंका

    अब तक के घटनाक्रम के अनुसार, करीब एक दर्जन से अधिक सिजेरियन केसों में से चार महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है। कई अन्य महिलाओं की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और वे डायलिसिस पर हैं। जानकारों का कहना है कि सभी मामलों में लक्षण एक जैसे हैं, जिससे अस्पताल में गंभीर संक्रमण (Infection) फैलने की आशंका गहरा गई है। संक्रमण की वजह से मरीजों की किडनी फेल होने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे और निष्पक्ष जांच पर अड़े परिजन

    कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। इधर, पीड़ित परिजनों का कहना है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, वे पीछे नहीं हटेंगे। अस्पताल प्रशासन ने अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।

    राजनीतिक तूल पकड़ता मामला

    कोटा के अस्पतालों में हो रही ये मौतें अब सियासी मुद्दा बन चुकी हैं। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए स्वास्थ्य कार्यों का हवाला देते हुए विपक्ष वर्तमान सरकार को घेर रहा है। फिलहाल, अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल और प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

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