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    6 महीने से फरार चल रहा फर्जी डिग्री गैंग का सरगना आखिरकार दबोचा गया

    छह महीने की फरारी के बाद शिकंजे में मास्टरमाइंड

    अजमेर:राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान दल (SOG) ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी डिग्रियां और अंकतालिकाएं तैयार करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना वीरेंद्र सिंह को धर दबोचा है। आरोपी पिछले छह महीनों से अपनी पहचान छिपाकर और मोबाइल फोन बंद कर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में फरारी काट रहा था। तकनीकी निगरानी और सटीक सूचना के आधार पर एसओजी की टीम ने 10 मई को उसे गिरफ्तार किया। सोमवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है ताकि इस बड़े रैकेट की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

    अंतरराज्यीय नेटवर्क और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर बिश्नोई के नेतृत्व में चल रही इस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का जाल केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर सहित कई अन्य राज्यों में फैला हुआ है। जांच एजेंसियां अब उन तकनीकी संसाधनों और प्रिंटिंग प्रेस का पता लगा रही हैं जहाँ मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम के नकली दस्तावेज छापे जाते थे। एसओजी यह भी खंगाल रही है कि अब तक कितने अभ्यर्थियों ने इस गिरोह से फर्जी प्रमाण पत्र खरीदे हैं और इस काले कारोबार में किन अन्य प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत है।

    स्कूल लेक्चरर भर्ती से जुड़ी है मामले की जड़ें

    इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा आरपीएससी की स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा-2022 के दौरान हुआ था, जब सांचौर की दो महिला अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच में फर्जी पाए गए थे। इस मामले में सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच एसओजी को सौंपी गई थी। इस प्रकरण में अब तक सरकारी शिक्षकों, डॉक्टरों और यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन सहित करीब एक दर्जन लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। मुख्य आरोपी से पूछताछ में कई नए नामों और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुए बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे होने की उम्मीद है।

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