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    प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ तसई में सती माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र

    महोत्सव में भंडारे की प्रसादी में शामिल हुए आसपास गांवों के हजारों श्रद्धालु

    कठूमर। क्षेत्र की ग्राम पंचायत तसई में दादी रामकुंवर सती माता मंदिर के जीर्णोद्धार के उपरांत मूर्ति स्थापना, प्राण प्रतिष्ठा, जागरण एवं विशाल भंडारे का चार दिवसीय धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में आसपास के अनेक गांवों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    जानकारी के अनुसार तसई स्थित दादी रामकुंवर सती माता मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य 7 जुलाई 2022 से शुरू हुआ था, जो मार्च 2026 में पूर्ण हुआ। पहले यहां केवल माता के पदचिन्ह विराजमान थे, लेकिन अब चौहान वंशीय राजपूत समाज के सहयोग से मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। मंदिर में सती माता की मूर्ति स्थापना, प्राण प्रतिष्ठा, जागरण और भंडारे का आयोजन धूमधाम से किया गया।

    महोत्सव की शुरुआत 12 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। गांव की महिलाओं और श्रद्धालुओं ने डीजे-बाजे के साथ परिक्रमा लगाकर कलश यात्रा निकाली। इसके बाद 13 मई को मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा, 14 मई को हवन-यज्ञ और रात्रि जागरण तथा 15 मई को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

    भंडारे में तसई सहित लख्खी का नगला, पीलू का नगला, धन सिंह का नगला, मुसैला का नगला, मथुआ का नगला, रामपुरा, करणपुरा, सूरजपुरा, दयालपुरा, चकचेलुआ और मसारी सहित आसपास के कई गांवों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और भोजन प्रसादी ग्रहण की।

    सती माता मंदिर सेवा समिति के सदस्य निहाल मास्टर ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में दादी रामकुंवर सती माता की मूर्ति प्रतिष्ठित की गई है। इसके अलावा पूजा सामग्री एवं अन्नपूर्णा भंडार के लिए दो कक्ष तथा भजन-कीर्तन के लिए एक विशाल हॉल का निर्माण कराया गया है। गर्भगृह के ऊपर 51 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा भव्य गुंबद बनाया गया है, जिसके शीर्ष पर कलश स्थापित किया गया है। साथ ही तीन बारादरी छतरियों में सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा माता की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।

    उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्य में अब तक लगभग 25 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि प्राण प्रतिष्ठा, जागरण और भंडारे में हुए खर्च का अलग से आकलन नहीं किया गया है।

    समिति के मुख्य कार्यकर्ता दुर्गा मास्टर ने बताया कि लगभग 503 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1580 वैशाख बदी पंचमी को दादी रामकुंवर अपने पति की मृत्यु के बाद इसी स्थान पर सती हुई थीं। उसी स्मृति में यहां प्राचीन मंदिर स्थापित था, जो समय के साथ जीर्ण-शीर्ण हो गया था। अब समाज के सहयोग से इसका भव्य पुनर्निर्माण किया गया है।

    तसई सरपंच मुकेश सिंह चौहान ने बताया कि यह आयोजन समाज की सहमति और सहयोग से चार दिन तक चला, जिसमें सर्व समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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