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    परिवार खोने का गम भारी पड़ा, पिता ने ढाई साल बाद उसी जगह खुदकुशी की

    कोल्हापुर। महाराष्ट्र के कोल्हापुर से एक बेहद भावुक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बेबस पिता ने अपनी जिंदगी का अंत उसी स्थान पर कर दिया जहाँ ढाई साल पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया था। अपनी आंखों के सामने पत्नी और दो मासूम बच्चों को खोने वाले इस शख्स के इस आत्मघाती कदम के बाद से पूरे इलाके में गहरा सन्नाटा और शोक की लहर दौड़ गई है।

    अपनों को खोने का असहनीय दर्द और हादसे की वो खौफनाक याद

    मृतक की पहचान 58 वर्षीय विराट विट्ठललाल गौतम के रूप में हुई है, जो पिछले काफी समय से अकेलेपन और मानसिक अवसाद से जूझ रहे थे। दरअसल, 23 नवंबर 2023 को कोल्हापुर के पुईखड़ी घाट के पास एक निजी बस की चपेट में आने से उनकी 43 वर्षीय पत्नी नीलू, 17 साल की बेटी रिद्धिमा और 13 साल के बेटे सार्थक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। उस भीषण सड़क हादसे में विराट तो शारीरिक रूप से बच गए थे, लेकिन अपने पूरे हंसते-खेलते परिवार को अचानक खो देने का गहरा सदमा उन्हें भीतर ही भीतर पूरी तरह खोखला कर रहा था।

    उसी पुण्यभूमि पर दी श्रद्धांजलि और फिर चुन लिया मौत का रास्ता

    शुक्रवार की सुबह कुछ राहगीरों को पुईखड़ी घाट के सुनसान इलाके में एक व्यक्ति का काफी पुराना शव पड़े होने की जानकारी मिली, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस को मृतक की जेब से मिले पहचान पत्रों के जरिए उनकी शिनाख्त विराट गौतम के रूप में करने में सफलता मिली। शुरुआती जांच और कड़ियों को जोड़ने पर यह दुखद सच सामने आया कि विराट विशेष रूप से उसी दुर्घटना स्थल पर पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी और बच्चों को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर वहीं पर जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

    सोशल मीडिया पर आखिरी खत और अधूरी दुनिया का छलका दर्द

    अपनी सांसों को हमेशा के लिए रोकने से ठीक पहले विराट ने सोशल मीडिया पर एक बेहद दर्दनाक और भावुक संदेश साझा किया था, जिसमें उनका बरसों का संजोया दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने अपने आखिरी पोस्ट में लिखा था कि वह अब इस दुनिया को और अपने शरीर को त्याग रहे हैं क्योंकि अपनी पत्नी और बच्चों के बिना उनकी इस जिंदगी का कोई मोल या अस्तित्व नहीं रह गया था। उन्होंने अत्यंत व्यथित मन से लिखा था कि उनकी दुनिया तो उसी पल पूरी तरह उजड़ गई थी जब उनका परिवार उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गया था और उसके बाद के ढाई साल उन्होंने सिर्फ और सिर्फ असहनीय मानसिक पीड़ा में काटे हैं।

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