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    सेविकाओं से 3500 रुपये वसूलने का मामला, न देने पर रोकते हैं सैलरी

    करगहर (रोहतास)। प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित सिरसियां आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 27 पर बच्चों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए पोशाक पहनाने और बाद में उसे वापस लेने का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि यहाँ एक और बड़ा घोटाला सामने आ गया है। आंगनबाड़ी सेविकाओं से बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और महिला पर्यवेक्षिका (सुपरवाइजर) द्वारा हर महीने 3,500 रुपये की बंधी-बंधाई रिश्वत लेने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है।

    रिश्वतखोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, ऑनलाइन भी लिया जाता है पैसा

    क्षेत्र में इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक आंगनबाड़ी सेविका और उसके पति इस पूरे घूसकांड की कलई खोलते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने के लिए बकायदा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन (डिजिटल पेमेंट) का भी सहारा लिया जाता है। इसके अलावा कुछ रसूखदार और रेंक की 'नेता' सेविकाएं इस पूरी अवैध वसूली के नेटवर्क को संचालित करने में बिचौलिए की भूमिका निभाती हैं, जिससे उनका अपना पैसा बच जाता है।

    पैसे न देने पर वेतन रोकने की धमकी, राशन वितरण में भी धांधली

    पीड़ित पक्षों का आरोप है कि जो भी सेविका हर महीने तय कमीशन देने से इनकार करती है, अधिकारी उसका नियमित मानदेय (वेतन) रोक देते हैं और केंद्र के लिए आने वाले अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति भी बाधित कर दी जाती है। वायरल वीडियो और सूत्रों के अनुसार, लेडी सुपरवाइजर (एलएस) के माध्यम से केंद्रों पर मिलने वाले सरकारी चावल और राशन के वितरण में भी बड़े पैमाने पर घालमेल किया जाता है। इस मामले पर जब संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और अन्य आला अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।

    मासूम बच्चों का निवाला छीनकर अधिकारियों की जेबें भरने का आरोप

    नाम न छापने की शर्त पर कई अन्य आंगनबाड़ी सेविकाओं ने खुलकर बताया कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें बेहद गहरी हैं। पहले प्रति केंद्र 2,500 रुपये महीना घूस के तौर पर वसूला जाता था, लेकिन साल 2025 से इस 'कमीशन' की राशि को बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी आने वाले अबोध और कुपोषित बच्चों के हक का पैसा काटकर इन भ्रष्ट अधिकारियों की जेबें गर्म की जा रही हैं, जो बेहद शर्मनाक है।

    जांच से बचने के लिए गुपचुप तरीके से बदला गया सीडीपीओ कार्यालय

    इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की नीयत पर तब और शक गहरा गया जब यह बात सामने आई कि लगभग चार महीने पहले तक सीडीपीओ कार्यालय प्रखंड परिसर के अंदर ही संचालित होता था। लेकिन विभागीय निगरानी और स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की नजरों से बचने के लिए प्रभारी सीडीपीओ ने बिना किसी सूचना के कार्यालय को वहां से आधा किलोमीटर दूर 'सेमरी रोड' पर शिफ्ट कर दिया। इस सुनसान जगह पर वरिष्ठ अधिकारियों का आना-जाना न के बराबर होता है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि अगर इस वायरल वीडियो की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई बड़े अधिकारी सीधे जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

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