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    Homeराज्यबिहारबिहार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर सियासत तेज

    बिहार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर सियासत तेज

    पटना। बिहार सहित पूरे देश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का बड़ा झटका लगा है। तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है, जो शुक्रवार रात से ही प्रभावी हो गई हैं। नई दरों के मुताबिक, पेट्रोल के दामों में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी पटना में पेट्रोल की कीमत 110.16 रुपये से छलांग लगाकर 111.11 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल 96.19 रुपये से बढ़कर 97.14 रुपये प्रति लीटर हो गया है। तेल के दामों में आई इस तेजी के बाद अब बिहार की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है।


    तेजस्वी यादव का तंज, बोले- कच्चे तेल के दाम कम फिर भी कीमतें दोगुनी

    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि इस जनविरोधी और पूंजीपरस्त एनडीए सरकार ने पिछले 10 दिनों में तेल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ा दिए हैं, यानी हर दिन औसतन 50 पैसे की बढ़ोतरी हो रही है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) सस्ता था, तब भी यह सरकार आम जनता की जेब काटकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही थी। साल 2014 के मुकाबले आज कच्चे तेल की कीमतें बेहद कम हैं, लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल के दाम दोगुने हो चुके हैं।

    आने वाले दिनों में भयंकर मंदी और बेरोजगारी का खतरा

    सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने देश के आर्थिक भविष्य को लेकर बड़ी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तेल की इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर हर आम और खास चीज पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में जनता को भयंकर महंगाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस आर्थिक बोझ के कारण प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां जाएंगी, प्रवासी मजदूरों को वापस लौटना पड़ेगा, छोटे उद्योग-धंधे ठप हो जाएंगे और देश में गरीबी व बेरोजगारी का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा।

    अहम मुद्दों को छोड़कर हेडलाइन मैनेजमेंट में जुटी सरकार

    नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि जनता ने जिस नफरत के कारोबार, भाषणबाजी, रील्स और एंटरटेनमेंट को चुना था, वह उन्हें लगातार मिलता रहेगा। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि नौकरी, गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और गिरती अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर विचार करने के बजाय सरकार का पूरा फोकस संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग, हेडलाइन मैनेजमेंट, हिंदू-मुस्लिम विवाद, मंदिर-मस्जिद और शहरों के नाम बदलने पर ही केंद्रित रहेगा।

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