जयपुर। राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कार्यशैली को पूरी तरह बदलने के लिए जयपुर सचिवालय से एक बहुत बड़ा आदेश जारी हुआ है। सूबे के वित्त विभाग ने प्रदेश में वित्तीय अनुशासन कायम करने और सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बेहद सख्त परिपत्र (परिपत्र दिनांक 08.04.2026 की निरंतरता में) जारी किया है। इस नए फैसले के तहत मंत्रियों के रसूख, आला आईएएस-आईपीएस अफसरों की सुख-सुविधाओं और सरकारी दफ्तरों के रोजमर्रा के खर्चों पर कड़ा नियंत्रण लगा दिया गया है। मुख्यमंत्री की सादगी की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए अब पूरे सिस्टम के लिए वीआईपी कल्चर को खत्म करना अनिवार्य कर दिया गया है।
मंत्रियों और अफसरों के काफिले पर ब्रेक, लागू होगा कार पूलिंग का नियम
नए सरकारी आदेश के मुताबिक, अब मंत्रियों, विभिन्न बोर्डों, निगमों, अकादमियों और आयोगों के पदाधिकारियों के काफिले (कारकेड) में केवल और केवल बेहद जरूरी न्यूनतम वाहन ही शामिल हो सकेंगे। फिजूल की गाड़ियों को तुरंत बेड़े से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि यदि एक ही गंतव्य या बैठक में जाना हो, तो अलग-अलग सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल करने के बजाय कार पूलिंग (Car Pooling) को प्राथमिकता दें।
सरकारी बेड़े से पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की विदाई; शहरों में ई-व्हीकल्स अनिवार्य
राजस्थान को ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण की ओर ले जाने के लिए सरकार ने अपने पूरे ट्रांसपोर्ट बेड़े का कायाकल्प करने का फैसला किया है। इसके तहत सभी सरकारी पेट्रोल और डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) में बदला जाएगा। पहले चरण में उन आला अधिकारियों को लक्षित किया गया है जिनकी ड्यूटी मुख्य रूप से शहर के भीतर (इंट्रा-सिटी) रहती है; इनके लिए भविष्य में खरीदे जाने वाले सभी नए वाहन केवल ई-व्हीकल ही होंगे। दफ्तरों में किराए (संविदा) पर ली जाने वाली गाड़ियों में भी ईवी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और सरकारी भवनों में समयबद्ध तरीके से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जाएगा।
विदेश यात्राओं और फाइव स्टार होटलों में आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध
जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई को फिजूलखर्च से बचाने के लिए वित्त विभाग ने कुछ बेहद कड़े कदम उठाए हैं:
विदेश यात्राओं पर रोक: सरकारी खजाने के खर्च पर होने वाली सभी प्रकार की विदेश यात्राओं और अध्ययन दौरों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
राजकीय भवनों में ही होंगे कार्यक्रम: सरकारी सेमिनार और समारोह अब किसी निजी फाइव स्टार होटल या महंगे रिजॉर्ट में न होकर केवल सरकारी भवनों में ही आयोजित किए जाएंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता: जिला कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों को बार-बार जयपुर बुलाने के बजाय विभागीय समीक्षा बैठकें अब अनिवार्य रूप से ऑनलाइन (VC के जरिए) की जाएंगी, जिससे यात्रा भत्ते (TA/DA) की भारी बचत होगी।
'राज-काज' पोर्टल से पेपरलेस वर्क और दफ्तरों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा
प्रशासनिक सुधार के तहत अब विभिन्न सरकारी कार्यालयों के बीच भौतिक पत्राचार (कागजी चिट्ठियों) को बंद कर शत-प्रतिशत 'ई-ऑफिस' और 'राज-काज' पोर्टल का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। खर्चीले फिजिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की जगह केंद्र के 'iGOT कर्मयोगी' पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। बिजली की बचत के लिए सभी सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जाएंगे और कार्यालय समय के बाद एसी-लाइट बंद रखना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और फैक्ट्रियों में कृषि यूरिया के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए 'एग्री-स्टैक' (Agri-Stack) पंजीयन अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इस पूरी गाइडलाइन की पालना के लिए संबंधित विभागों के प्रभारी सचिव और विभागाध्यक्ष सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे।


