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    गुजरात एटीएस की ऐतिहासिक कामयाबी: मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ा गया 1150 करोड़ की कोकेन से भरा जहाज

    अहमदाबाद: गुजरात एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) और भारतीय कोस्ट गार्ड ने मिलकर देश के इतिहास में समुद्री रास्ते से होने वाली ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने मुंद्रा बंदरगाह पर एक मालवाहक जहाज से करीब 1150 करोड़ रुपये की कोकेन जब्त की है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह ड्रग्स भरा जहाज 7 अलग-अलग देशों से होकर भारत पहुंचा, लेकिन दुनिया की किसी भी सुरक्षा एजेंसी को इसकी कानों-कान भनक तक नहीं लगी। जैसे ही यह जहाज भारतीय समुद्री सीमा में पहुंचा, मुस्तैद सुरक्षा बलों ने इसे चारों तरफ से घेर लिया और ड्रग्स की खेप को अपने कब्जे में ले लिया।

    फिल्म 'पुष्पा' के स्टाइल में इंजन रूम में छिपाई थी कोकेन

    इस ड्रग्स की तस्करी का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। तस्करों ने दक्षिण भारतीय ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के स्टाइल में कोकेन के पैकेटों को जहाज के इंजन रूम के अंदर बेहद शातिर तरीके से छिपा रखा था। यही वजह थी कि यह जहाज 196 दिनों तक समुद्र में घूमता रहा और 7 देशों के 23 अलग-अलग बंदरगाहों (पोर्ट्स) पर रुकने के बावजूद पकड़ा नहीं गया। एमवी यूरोप (MV Europe) नाम का यह मालवाहक जहाज सबसे पहले ब्राजील से रवाना हुआ था। इसके बाद यह अर्जेंटीना, उरुग्वे, पनामा, बहामा, डोमिनिकन रिपब्लिक और अमेरिका जैसे देशों से होते हुए भारत की तरफ बढ़ा था।

    पिछले साल मई से एटीएस कर रही थी पीछा

    गुजरात एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस जहाज के जरिए ड्रग्स की इतनी बड़ी सप्लाई होने की गुप्त जानकारी पिछले साल मई में ही मिल गई थी, जब ब्राजील में इस ड्रग्स को पैक किया जा रहा था। भारतीय एजेंसियां तभी से इस अंतरराष्ट्रीय जहाज को लगातार ट्रैक कर रही थीं। शिपिंग रिकॉर्ड्स के मुताबिक, यह जहाज 11 नवंबर 2025 को ब्राजील के साओ विकेंटे बंदरगाह पर रुका था। इसके बाद इसने पनामा नहर को पार किया और अमेरिका के पूर्वी तट समेत कई देशों में कुल 40 बार रुका, लेकिन कहीं भी इसके इंजन रूम की तलाशी नहीं ली गई।

    मुंबई और पाकिस्तान होते हुए मुंद्रा पहुंचा जहाज

    आखिरकार यह जहाज दक्षिण एशिया की तरफ मुड़ा और 19 मई को मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर पहुंचा। इसके बाद 22 मई को यह पाकिस्तान के पोर्ट कासिम गया और वहां से 26 मई को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर आकर रुका। मुंद्रा में यह जहाज दो दिनों तक ठहरा रहा। तस्करों का प्लान था कि समुद्र के बीच (आउटर एंकरेज) में एक छोटी नाव या दूसरे जहाज को बुलाकर इस ड्रग्स को उसमें ट्रांसफर कर दिया जाए। लेकिन एटीएस और कोस्ट गार्ड की कड़ी निगरानी की वजह से तस्करों का यह मास्टर प्लान पूरी तरह फेल हो गया।

    घबराए क्रू मेंबर्स ने समुद्र में फेंके बैग

    जैसे ही भारतीय कोस्ट गार्ड और एटीएस की संयुक्त टीम ने समुद्र के बीच में इस जहाज की घेराबंदी शुरू की, जहाज के क्रू मेंबर्स (कर्मचारियों) में हड़कंप मच गया। पकड़े जाने के डर से उन्होंने कोकेन से भरे भारी-भरकम बैगों को तुरंत समुद्र में फेंकना शुरू कर दिया। हालांकि, सतर्क सुरक्षा बलों ने समुद्र के पानी से तैरते हुए 5 बड़े बैग सुरक्षित बाहर निकाल लिए, जिनके अंदर से 115 पैकेट शुद्ध कोकेन बरामद हुई। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में आई कोकेन को सिर्फ भारत में नहीं खपाना था, बल्कि भारत का इस्तेमाल केवल एक 'डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट' (माल बांटने की जगह) के रूप में किया जा रहा था, जहां से इसे अन्य देशों में भेजा जाना था।

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