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    किसके सिर सजेगा राज्यसभा का ताज? दो सीटों के लिए बिछी बिसात, 4 जादुई वोटों की तलाश

    रांची | झारखंड में राज्यसभा की दो खाली सीटों पर आगामी 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच गई है। एक तरफ जहां सत्ताधारी गठबंधन दोनों सीटों पर अपना परचम लहराने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी चुनावी मैदान में कड़ी चुनौती देने की योजना बना रही है। विधानसभा के वर्तमान गणित और संख्या बल को देखा जाए तो भाजपा को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम चार अतिरिक्त मतों (वोटों) की आवश्यकता होगी। ऐसे में भगवा दल की पूरी रणनीति विपक्षी खेमे में संभावित सेंधमारी (क्रॉस वोटिंग) और निर्दलीय व सहयोगी विधायकों के समर्थन को जुटाने पर केंद्रित हो गई है।

    सत्ताधारी गठबंधन और कांग्रेस में चेहरों को लेकर मंथन

    सत्तारूढ़ खेमे में उम्मीदवारों के चयन को लेकर बैठकों और कयासों का दौर जारी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के भीतर से पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की सुपुत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन नेमनी सोरेन का नाम रेस में सबसे आगे चल रहा है। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य और विधायक कल्पना सोरेन के नामों की भी सियासी हलकों में जमकर चर्चा हो रही है। दूसरी ओर, गठबंधन सहयोगी कांग्रेस में भी टिकट के लिए रस्साकशी तेज है, जहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचु और राजेश ठाकुर को मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी आलाकमान क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लेने की तैयारी में है।

    एनडीए खेमे में दिग्गज नामों पर विचार, 'निशा उरांव' के नाम से चौंकाया

    विपक्षी दल भाजपा और एनडीए गठबंधन में भी कई कद्दावर नेताओं के नामों पर गंभीरता से विचार-विमर्श चल रहा है। संभावित प्रत्याशियों की सूची में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और सीता सोरेन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन सबके बीच, एक आईआरएस (IRS) अधिकारी निशा उरांव के नाम ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। निशा उरांव दरअसल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी हैं, जिसके कारण इस नाम के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार बेहद गर्म हो गया है।

    दिल्ली से तय होंगे नाम, क्रॉस वोटिंग के सहारे उलटफेर की उम्मीद

    इस बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश भाजपा इकाई सभी योग्य और संभावित उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेज रही है, और टिकट को लेकर अंतिम मुहर दिल्ली में शीर्ष कमान द्वारा ही लगाई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी इस चुनाव को पूरी मजबूती से लड़ेगी। दिलचस्प बात यह है कि बाबूलाल मरांडी द्वारा विधायकों से 'अंतरात्मा की आवाज' पर वोट देने की अपील किए जाने के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा विपक्षी खेमे में असंतुष्ट विधायकों के भरोसे किसी बड़े उलटफेर की ताक में है। अब सभी दलों की निगाहें दिल्ली और रांची के आलाकमानों के अंतिम फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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