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    राजस्थान में सियासी हलचल तेज, राहुल गांधी का पुष्कर दौरा बना केंद्र

    पुष्कर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार को राजस्थान के पुष्कर दौरे पर रहेंगे। वे अजमेर जिले के तिलोरा में आयोजित कांग्रेस के 10 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन एवं प्रशिक्षण शिविर के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। राहुल गांधी का यह दौरा राजस्थान कांग्रेस संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान वे पार्टी कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं को आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने तथा संगठनात्मक रणनीति को धार देने के लिए नए मंत्र देंगे।

    दौरे का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी सुबह 10 बजे विशेष विमान से किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां से वे सड़क मार्ग द्वारा सीधे तिलोरा स्थित प्रशिक्षण शिविर के लिए रवाना होंगे। शिविर के समापन सत्र में वे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से संबोधित करेंगे। इस दौरान वे 'संगठन सृजन अभियान' के तहत पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत व सक्रिय बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा करेंगे।

    10 दिनों से चल रहा है महामंथन

    कांग्रेस के इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में राजस्थान और दिल्ली के जिला कांग्रेस अध्यक्षों समेत कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं ने हिस्सा लिया है। पिछले 10 दिनों से चल रहे इस शिविर में मुख्य रूप से संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क अभियान को धार देने और आगामी चुनावी तैयारियों के खाके पर गहन मंथन किया गया है। राहुल गांधी इस मंथन के बाद निकले निष्कर्षों की समीक्षा भी करेंगे।

    दौरे के गहरे राजनीतिक मायने

    कर्नाटक में हाल ही में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद कांग्रेस हाईकमान अब अन्य राज्यों के संगठनों को दुरुस्त करने पर पूरा फोकस कर रहा है। ऐसे समय में राहुल गांधी का राजस्थान आना कई बड़े राजनीतिक संकेत दे रहा है। वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें तेज हैं कि क्या राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होगा या उन्हें ही जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके साथ ही पार्टी यहां साल 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव और फिर 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए अभी से जमीनी ढांचा तैयार करना चाहती है।

    गुटबाजी खत्म कर एकजुटता का संदेश

    राजस्थान कांग्रेस में लंबे समय से जारी अशोक गहलोत, सचिन पायलट और डोटासरा खेमे के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय नेतृत्व के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी अपने इस दौरे के जरिए सभी धड़ों को एक साथ लाकर संगठनात्मक एकजुटता का कड़ा संदेश दे सकते हैं। यदि वे अपने संबोधन में संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने या नए चेहरों को आगे लाने पर जोर देते हैं, तो इसे आने वाले दिनों में राजस्थान कांग्रेस के भीतर एक बड़े फेरबदल की शुरुआत माना जाएगा।

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