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    Homeराज्यमध्यप्रदेशMP में बस किराया विवाद गहराया, ऑपरेटर्स बोले- बढ़ोतरी नहीं तो हड़ताल

    MP में बस किराया विवाद गहराया, ऑपरेटर्स बोले- बढ़ोतरी नहीं तो हड़ताल

    भोपाल: मध्य प्रदेश में बसों से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। राज्य के बस संचालकों (बस ऑपरेटर्स) ने सरकार को बसों का किराया बढ़ाने का एक नया प्रस्ताव सौंपा है। 'एमपी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन' के पदाधिकारियों ने प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर अपनी मांगें सामने रखी हैं। संचालकों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर किराया बढ़ाने पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश के बस संचालक सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

    घाटे में चल रहा है बसों का कारोबार

    बस संचालकों का कहना है कि सरकार द्वारा किराया न बढ़ाए जाने के कारण पिछले 5 सालों से उनका कारोबार भारी घाटे में चल रहा है। बाजार में डीजल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, जिससे बसों को चलाना अब उनके बजट से बाहर हो गया है। इसके साथ ही संचालकों ने तर्क दिया कि बसों के कल-पुर्जों, टायरों और रखरखाव (मेंटेनेंस) का खर्च भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। कमाई न होने की वजह से कई संचालक बसों का नियमित मेंटेनेंस भी नहीं करा पा रहे हैं, जिससे यह पूरा बिजनेस घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

    प्रति किलोमीटर ढाई रुपये बढ़ोतरी की मांग

    बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि बसों के किराए में 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की जाए। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में आखिरी बार बसों का किराया 20 अप्रैल 2021 को बढ़ाया गया था। उस समय सरकार ने किराए में 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर का इजाफा किया था, जबकि संचालकों ने 1.65 रुपये की मांग की थी। किराए को बढ़ाने की इस ताजा मांग पर परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरोसा दिलाया है कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही कोई उचित फैसला लिया जाएगा।

    यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि, महंगाई की मार भारी

    एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन और सुरेंद्र तनवानी ने साझा बयान में कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण बसों के रख-रखाव पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन वे यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अकेले मई के महीने में ही डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसने बस संचालन की लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। ऐसे में किराया बढ़ाना अब मजबूरी बन गया है।

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