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    ग्रेट निकोबार और अरावली संरक्षण पर बोले टीकाराम जूली, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला विकास विनाश के समान

    अवैध खनन के कारण पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है हमारी जीवनदायिनी अरावली संकट में

    जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर किया जाने वाला विकास वास्तव में विकास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विनाश का मार्ग है।

    जूली ने कहा कि वे ग्रेट निकोबार द्वीप के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान के समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी इस अभियान से जुड़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई है। उनका कहना है कि ग्रेट निकोबार केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है, जहां करोड़ों पेड़-पौधे, प्राचीन वर्षावन और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। इसे बचाना देशवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    अवैध खनन से अरावली पर मंडरा रहा खतरा

    नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश में हो रहे अवैध खनन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अलवर सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध खनन के कारण पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है और जीवनदायिनी अरावली पर्वतमाला संकट का सामना कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। जंगलों और पहाड़ों को नष्ट कर किया जाने वाला विकास टिकाऊ नहीं हो सकता। सरकार को पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

    अरावली संरक्षण पर कोर्ट के फैसले का स्वागत

    जूली ने अरावली संरक्षण मामले में न्यायालय द्वारा विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह केवल अदालत के निर्देशों का इंतजार न करे, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर अरावली संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए।

    उन्होंने कहा कि अरावली राजस्थान का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है और इसे किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाना चाहिए।

    ‘एक पेड़ सौ पुत्रों के बराबर’ की संस्कृति को अपनाने का आह्वान

    राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि भारतीय परंपरा में एक पेड़ को सौ पुत्रों के समान माना गया है। उन्होंने खेजड़ली आंदोलन और अमृता देवी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि राजस्थान की पहचान हमेशा प्रकृति संरक्षण से जुड़ी रही है।

    उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि हर व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक संकल्प ले और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर प्रकृति को सुरक्षित बनाने में योगदान दे।

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