उत्तर और मध्य भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के इस दौर में एयर कंडीशनर (AC) अब ऐशो-आराम की चीज नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है। घर से लेकर दफ्तर और गाड़ियों तक में लोग दिन-रात एसी की ठंडी हवा में वक्त गुजार रहे हैं। कई लोग तो ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे एसी वाले बंद कमरों में ही रहते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार कृत्रिम (आर्टिफिशियल) ठंडी हवा के संपर्क में रहने से शरीर का नेचुरल सिस्टम बिगड़ जाता है, जिससे कई गंभीर बीमारियां हमें अपनी चपेट में ले लेती हैं।
आइए जानते हैं कि दिन-रात एसी में रहना हमारी सेहत को किस तरह नुकसान पहुंचा रहा है:
1. स्किन का रूखापन और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)
एयर कंडीशनर कमरे को ठंडा करने के लिए हवा की सारी नमी (ह्यूमिडिटी) को सोख लेता है। नमी खत्म होने से हमारी त्वचा अपनी प्राकृतिक कोमलता खो देती है, जिससे स्किन में खिंचाव, ड्राईनेस और खुजली होने लगती है। इसके अलावा, एसी में पसीना नहीं आता जिससे प्यास का अहसास कम होता है। पानी कम पीने की यह आदत शरीर के अंदरूनी अंगों में डिहाइड्रेशन की वजह बन जाती है।
2. सांस की बीमारियां और एलर्जी का अटैक
लगातार ठंडी और शुष्क हवा में सांस लेने से नाक और गले के अंदर की झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) सूख जाती है। इससे गले में लगातार खराश, सूखी खांसी और नाक बंद होने की समस्या शुरू हो जाती है। सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब एसी के फिल्टर की समय पर सर्विसिंग नहीं होती; उसमें जमा धूल, बैक्टीरिया और फंगस हवा के जरिए हमारे फेफड़ों तक पहुंचते हैं। अस्थमा और साइनस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक है।
3. सिरदर्द, माइग्रेन और लगातार सुस्ती
जब कोई व्यक्ति बहुत कम तापमान (जैसे 18 या 20 डिग्री) वाले एसी कमरे से अचानक बाहर की तेज धूप और गर्मी में जाता है, तो शरीर को तापमान के इस बड़े अंतर को झेलना पड़ता है। इस अचानक बदलाव से सिरदर्द, माइग्रेन का ट्रिगर होना, चक्कर आना और भारी सुस्ती छाने लगती है। अत्यधिक ठंडक ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) को भी धीमा कर देती है।
4. हड्डियों में अकड़न और जोड़ों का पुराना दर्द
एसी की सीधी और ठंडी हवा जब शरीर पर पड़ती है, तो मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। लंबे समय तक ऐसे माहौल में बैठने से गर्दन, कंधे और कमर में जकड़न पैदा हो जाती है। आर्थराइटिस (गठिया) या हड्डियों के पुराने दर्द से जूझ रहे मरीजों की तकलीफ एसी में रहने के कारण कई गुना बढ़ जाती है।
5. आंखों में भयंकर जलन और 'ड्राई आई सिंड्रोम'
हवा में नमी की कमी का सबसे पहला और बुरा असर हमारी आंखों पर पड़ता है। इससे आंखों के आंसू तेजी से सूखते हैं और 'ड्राई आई सिंड्रोम' की शिकायत हो जाती है, जिससे आंखों का लाल होना, चुभन और खुजली आम बात हो जाती है। जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं या घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठते हैं, उन्हें यह समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है।
6. रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) का कमजोर होना
प्राकृतिक वातावरण और खुली हवा से दूर हमेशा बंद कमरों में रहने के कारण शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत (इम्यूनिटी) कम होने लगती है। शरीर का तापमान संतुलित करने वाला सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे व्यक्ति बेहद संवेदनशील हो जाता है और उसे बहुत जल्दी सर्दी-जुकाम या वायरल इंफेक्शन अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं।
बचाव के लिए क्या करें?
तापमान संतुलित रखें: एसी को हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच चलाएं, यह तापमान शरीर के लिए अनुकूल माना जाता है।
पानी पीते रहें: प्यास न लगने पर भी हर आधे-एक घंटे में पानी या लिक्विड डाइट लेते रहें।
फिल्टर की सफाई: हर 15 दिन में एसी के फिल्टर को निकालकर खुद साफ करें ताकि धूल और बैक्टीरिया हवा में न फैलें।
नेचुरल हवा भी लें: दिनभर में कुछ समय एसी बंद करके खिड़कियां खोलें, ताकि ताजी हवा कमरे के भीतर आ सके।


