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    फिटनेस ट्रैकिंग के चक्कर में कहीं सेहत पर न पड़ जाए असर, जानें नुकसान

    आज के दौर में लोग तंदुरुस्ती और फिटनेस को लेकर बेहद गंभीर हो गए हैं। यही वजह है कि कलाई पर स्मार्ट वॉच बांधने का चलन काफी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यह गैजेट न सिर्फ हमारे कदमों को गिनता है, बल्कि दिल की धड़कन (हार्ट रेट) मापने और बर्न हुई कैलोरी का पूरा हिसाब-किताब भी रखता है, जिससे लोग एक सेहतमंद जीवनशैली के लिए प्रेरित होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर वक्त इस डिजिटल घड़ी को पहने रखना फायदे की जगह भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों और त्वचा रोग डॉक्टरों के मुताबिक, 24 घंटे स्मार्ट वॉच कलाई पर बांधे रखने से शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। आइए जानते हैं इससे होने वाले नुकसान और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में:

    1. त्वचा में संक्रमण, खुजली और लाल चकत्ते

    लगातार घड़ी पहने रहने से कलाई की त्वचा को हवा नहीं मिल पाती, जिससे वहां पसीना और नमी जमा होने लगती है। खासकर उमस और गर्मी के मौसम में यह नमी बैक्टीरिया और फंगस को पनपने के लिए मुफीद जगह दे देती है। इसके कारण कलाई पर तेज खुजली, त्वचा का लाल होना और रैशेज जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। कई बार इसके स्ट्रैप या मेटल (धातु) से लोगों को गंभीर एलर्जिक रिएक्शन भी हो जाता है।

    2. गहरी और सुकून भरी नींद में खलल

    कई लोग अपनी स्लीप साइकिल (नींद के चक्र) को ट्रैक करने के लिए रात में भी इसे पहनकर सोते हैं। लेकिन रातभर इस डिवाइस का एक्टिव रहना, समय-समय पर होने वाले वाइब्रेशन और स्क्रीन की लाइट आपके दिमाग को पूरी तरह शांत (रिलैक्स) नहीं होने देते। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति की गहरी नींद प्रभावित होती है और सुबह उठने पर भी शरीर में थकान बनी रहती है।

    3. 'परफेक्ट' दिखने की होड़ और मानसिक तनाव

    स्मार्ट वॉच दिनभर आपको कदम चलने, पानी पीने और कैलोरी घटाने के टारगेट के नोटिफिकेशन भेजती रहती है। इससे इंसान के दिमाग पर अनजाने में ही हर वक्त 'परफेक्ट परफॉर्मेंस' देने का एक मानसिक दबाव बनने लगता है। जब किसी दिन ये टारगेट पूरे नहीं होते, तो व्यक्ति में निराशा, खीझ और एंग्जायटी (चिंता) बढ़ने लगती है। फिटनेस डेटा पर बहुत ज्यादा निर्भरता अंततः मानसिक रूप से थका देती है।

    4. वायरलेस रेडिएशन का धीमा असर

    स्मार्ट वॉच एक ऐसी वायरलेस तकनीक है जो ब्लूटूथ और वाई-फाई सिग्नल्स के जरिए हर पल हमारे फोन से जुड़ी रहती है। माना कि इससे निकलने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन बेहद कम स्तर का होता है, लेकिन 24 घंटे इसके सीधे शारीरिक संपर्क में रहने को वैज्ञानिक पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानते। यह हमारे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) को प्रभावित कर सकता है।

    5. भ्रामक आंकड़ों पर आंखें मूंदकर भरोसा

    ज्यादातर स्मार्ट वॉच द्वारा दिखाए जाने वाले आंकड़े (जैसे हार्ट रेट या बर्न कैलोरी) 100% सटीक नहीं होते हैं। कई बार लोग इसके गलत या अनुमानित डेटा को ही सच मानकर अपनी डाइट और हैवी वर्कआउट में बड़े बदलाव कर लेते हैं, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।

    बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी तरीके:

    • कलाई को दें आराम: पूरे दिन में कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए घड़ी को कलाई से उतारकर त्वचा को खुली हवा लगने दें।

    • सोते समय कहें 'ना': रात को बिस्तर पर जाने से पहले इसे अनिवार्य रूप से उतारकर रख दें।

    • साफ-सफाई बेहद जरूरी: हफ्ते में कम से कम दो बार वॉच के पिछले हिस्से और उसके स्ट्रैप को अच्छी तरह साफ व सूखा रखें।

    • तकनीक के गुलाम न बनें: इसे केवल एक गैजेट की तरह इस्तेमाल करें, अपनी सेहत के फैसले घड़ी के आंकड़ों के बजाय अपने शरीर के असली संकेतों को समझकर लें।

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