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    क्या है वैम्पायर फेशियल? त्वचा को जवान बनाए रखने वाले इस ट्रीटमेंट की पूरी जानकारी

    आज के आधुनिक दौर में बेदाग, चमकदार और ढलती उम्र के असर से मुक्त त्वचा पाने की चाहत हर किसी की होती है। इसी चाहत के चलते आजकल कॉस्मेटिक और स्किन केयर ट्रीटमेंट्स का बाजार बेहद गर्म है। पिछले कुछ समय से ब्यूटी और ग्लैमर जगत में एक अनोखा स्किन ट्रीटमेंट खूब सुर्खियां बटोर रहा है, जिसे आम भाषा में "वैम्पायर फेशियल" कहा जाता है। सुनने में यह नाम भले ही थोड़ा डरावना या अजीब लगे, लेकिन त्वचा को नया जीवन देने वाली यह आज की बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है।

    चिकित्सा विज्ञान में वैम्पायर फेशियल को प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (PRP) फेशियल के नाम से जाना जाता है। इस कॉस्मेटिक प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी बाहरी केमिकल के बजाय इंसान के खुद के ही खून का इस्तेमाल किया जाता है। रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स और हीलिंग तत्वों को अलग करके चेहरे की त्वचा पर इंजेक्ट किया जाता है, जिससे डैमेज स्किन अंदर से रिपेयर होती है। बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकने (एंटी-एजिंग) के लिए इसे एक अचूक उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। चेहरे की महीन रेखाएं, झुर्रियां, मुंहासों के पुराने दाग और ढीली पड़ चुकी त्वचा को कसने के लिए लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं।

    आखिर कैसे की जाती है यह पूरी प्रक्रिया?

    वैम्पायर फेशियल पूरी तरह से एक गैर-सर्जिकल (बिना चीर-फाड़ वाली) प्रक्रिया है, जिसे पूरा होने में लगभग 45 से 90 मिनट का समय लगता है:

    • ब्लड सैंपल: सबसे पहले मरीज के हाथ से सामान्य तरीके से थोड़ी मात्रा में खून निकाला जाता है।

    • प्लाज्मा को अलग करना: इस निकाले गए खून को एक विशेष सेंट्रीफ्यूज मशीन में डालकर तेजी से घुमाया जाता है। इससे लाल रक्त कोशिकाएं नीचे बैठ जाती हैं और प्लेटलेट्स से भरपूर पीले रंग का गाढ़ा प्लाज्मा (PRP) ऊपर आ जाता है।

    • माइक्रोनीडलिंग और अवशोषण: इसके बाद मरीज के चेहरे पर बारीक सुइयों वाली मशीन (माइक्रोनीडलिंग) से बेहद सूक्ष्म छेद बनाए जाते हैं। फिर तैयार किए गए पीआरपी लिक्विड को चेहरे पर लगाया जाता है, ताकि त्वचा के रोमछिद्र इसे गहराई तक सोख सकें।

    त्वचा को मिलने वाले संभावित लाभ

    इस फेशियल को कराने वाले विशेषज्ञों का दावा है कि यह त्वचा के भीतर कोलेजन (Collagen) नामक प्रोटीन के निर्माण को तेजी से बढ़ाता है। कोलेजन बढ़ने से चेहरे का ढीलापन दूर होता है और त्वचा अधिक टाइट, स्मूद और चमकदार नजर आने लगती है। यह चेहरे के असमान टेक्सचर और बेजान त्वचा में नई जान फूंकने का काम करता है।

    सावधानी भी है जरूरी: क्या हैं इसके साइड इफेक्ट्स?

    चूंकि यह एक क्लीनिकल प्रक्रिया है, इसलिए इसके कुछ सामान्य और अस्थाई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं:

    • ट्रीटमेंट लेने के तुरंत बाद चेहरे पर हल्का लालपन (लालिमा), सूजन, हल्की जलन या त्वचा का संवेदनशील होना बेहद सामान्य है, जो दो से तीन दिनों में ठीक हो जाता है।

    • सबसे बड़ा जोखिम संक्रमण (इन्फेक्शन) का होता है। यदि यह प्रक्रिया किसी गैर-प्रमाणित या अस्वच्छ जगह पर अप्रशिक्षित व्यक्ति से कराई जाए, तो सुइयों के जरिए त्वचा में गंभीर संक्रमण फैल सकता है। इसलिए हमेशा किसी अनुभवी डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) से ही यह ट्रीटमेंट कराएं।

    ये लोग भूलकर भी न कराएं वैम्पायर फेशियल

    यदि आप नीचे दी गई किसी भी स्थिति से गुजर रहे हैं, तो बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के इस ट्रीटमेंट को कराने की गलती बिल्कुल न करें:

    1. रक्त और त्वचा विकार: जिन्हें खून से संबंधित कोई बीमारी (जैसे एनीमिया या थक्के न बनना) हो या चेहरे पर कोई एक्टिव स्किन इन्फेक्शन हो।

    2. गंभीर बीमारियां: ऑटोइम्यून डिजीज या किसी गंभीर एलर्जी से पीड़ित मरीज।

    3. गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के कॉस्मेटिक ब्लड ट्रीटमेंट से पूरी तरह बचना चाहिए।

    4. विशेष दवाएं: जो लोग खून पतला करने वाली या अन्य हैवी दवाइयों का सेवन कर रहे हैं।

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