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    अमरनाथ यात्रा पर खतरे की घंटी, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

    जम्मू: देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र 'श्री अमरनाथ यात्रा' पर भी अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। कश्मीर के अनंतनाग जिले में समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा क्षेत्र के आसपास पिछले 12 वर्षों में मौसम के मिजाज में बेहद चिंताजनक बदलाव आया है। आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा के मुख्य महीनों (जून से अगस्त) के दौरान इस उच्च पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है।

    समय से पहले अंतर्ध्यान हो रहे बाबा बर्फानी, 20 डिग्री तक पहुंचा पारा

    मौसम विज्ञानियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तापमान में वृद्धि और स्थानीय पारिस्थितिकी पर बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों से अमरनाथ यात्रा के पहले महीने (शुरुआती हफ्तों) में ही पवित्र हिमलिंग समय से पहले पिघलकर अंतर्ध्यान हो रहे हैं। वर्तमान समय में पवित्र गुफा के आसपास का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र को बचाने के लिए तुरंत कड़े व्यावहारिक कदम नहीं उठाए गए, तो अगले दो दशकों में यहां का तापमान और ज्यादा भयानक रूप ले सकता है, जिससे हिमलिंग के निर्माण की प्राकृतिक प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।

    12 वर्षों में 15 से बढ़कर 24 डिग्री तक पहुंचा अधिकतम तापमान

    पवित्र गुफा क्षेत्र के तापमान का तुलनात्मक रिकॉर्ड बेहद चौंकाने वाला है:

    • वर्ष 2012 का हाल: आज से 12-14 साल पहले जून से अगस्त के बीच इस ऊंचाई पर अधिकतम तापमान महज 15 से 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था, जिससे हिमलिंग लंबे समय तक सुरक्षित रहता था।

    • वर्ष 2024 और वर्तमान स्थिति: तापमान बढ़ने का यह सिलसिला वर्ष 2016 के बाद से और तेज हुआ और पिछले वर्षों में यह रिकॉर्ड 24 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। 13 हजार फीट की ऊंचाई पर इतना अधिक तापमान ग्लेशियरों और बर्फ के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है।

    भीड़ नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन के लिए प्रशासन अलर्ट

    मौसम के इस बिगड़ते रुख और पर्यावरण के खतरे को देखते हुए श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह चौकस है। पिछले दो वर्षों से यात्रा के दौरान पवित्र गुफा के ठीक आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित और कम करने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। गुफा के पास मानवीय गतिविधियों और उससे उत्पन्न होने वाली गर्मी (एंथ्रोपोजेनिक हीट) को कम करने के लिए दर्शन की कतारों और ठहरने की व्यवस्था में कड़े वैज्ञानिक बदलाव किए गए हैं, ताकि इस पावन प्राकृतिक विरासत को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

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