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    महिला मरीजों की परेशानी बढ़ी, रिम्स में साझा शौचालय व्यवस्था पर उठे सवाल

    राँची। झारखंड के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इन दिनों बुनियादी सुविधाओं का भारी टोटा देखने को मिल रहा है, जिसके कारण मरीजों और तीमारदारों को भारी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। अस्पताल के पुराने भवन में स्थित आपातकालीन विभाग (इमरजेंसी वार्ड) के समीप महिला रोगियों और उनके साथ आई महिलाओं के लिए पृथक प्रसाधन की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण उन्हें विवश होकर पुरुषों के साथ साझा शौचालय का प्रयोग करना पड़ रहा है। इसके साथ ही परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे करोड़ों रुपये के वार्षिक बजट वाले इस बड़े सरकारी अस्पताल की कागजी सुविधाओं और जमीनी हकीकत का अंतर साफ उजागर हो गया है।

    महिलाओं की निजता और सुरक्षा पर गहराता संकट

    रिम्स के पुराने विंग में स्थित इमरजेंसी वार्ड के पास महिला और पुरुष दोनों के लिए केवल एक ही संयुक्त शौचालय क्रियाशील है। पृथक व्यवस्था न होने के कारण दिन-रात महिलाओं को उसी प्रसाधन कक्ष में जाना पड़ता है, जहां पुरुष आते-जाते हैं। चिकित्सा संस्थान में सुरक्षा और सहूलियत को लेकर किए जाने वाले ऊंचे-ऊंचे दावों के बीच महिलाओं की प्राइवेसी से जुड़ा यह गंभीर मामला अस्पताल प्रशासन की उदासीनता को बयां कर रहा है, जिसे लेकर वहां आने वाले लोगों में भारी रोष व्याप्त है।

    अस्पताल परिसर में पीने के साफ पानी की भारी किल्लत

    संस्थान के भीतर मरीजों और आम जनता की प्यास बुझाने के लिए लगाई गई वाटर कूलर और फिल्टर मशीनें वर्तमान में बदहाली के आंसू बहा रही हैं। इन पेयजल स्रोतों के चारों तरफ गंदगी और कीचड़ का साम्राज्य फैला हुआ है, वहीं मशीनों से आने वाले पानी की शुद्धता भी संदेह के घेरे में है। इस अव्यवस्था के चलते सुदूर ग्रामीण अंचलों से आने वाले निर्धन परिवारों को जेब ढीली कर बाहर से बोतलबंद पानी खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर अन्य लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परिसर में भटकने को विवश हैं।

    प्रशासन की ओर से जल्द व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा

    अस्पताल के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने पेयजल से जुड़ी इस गंभीर खामी की बात को स्वीकार करते हुए इस पर जल्द सुधारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन विभाग के निकट महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट न होने का विषय भी उनके संज्ञान में आया है। महिलाओं की सहूलियत, सुरक्षा और निजता को प्राथमिकता देते हुए जल्द ही वहां विशेष प्रसाधन कक्ष का निर्माण कराया जाएगा, ताकि अस्पताल आने वाले हर नागरिक को एक स्वच्छ और सुरक्षित माहौल मिल सके।

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