भगवान आदिनाथ का तप कल्याणक, वैराग्य और दीक्षा का संदेश गूंजा
लक्ष्मणगढ़। कस्बे के जालूकी रोड स्थित अयोध्या धर्म नगरी के विशेष पंडाल में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का तप (दीक्षा) कल्याणक श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान आदिनाथ की भव्य बारात एवं शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
धार्मिक आयोजन के दौरान तप कल्याणक पर आधारित नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया, जिसमें भगवान आदिनाथ के राजवैभव त्यागकर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणादायक गाथा का चित्रण किया गया।
जैन विद्वान पंडित अरविंद शास्त्री ने अपने प्रवचन में बताया कि देवराज इंद्र की सभा में नीलांजना अप्सरा के नृत्य के दौरान उसकी अकस्मात मृत्यु ने भगवान आदिनाथ को संसार की नश्वरता का बोध कराया। इसी घटना से उनमें वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने राजपाट, वैभव तथा सांसारिक सुखों का त्याग कर चैत्र कृष्ण नवमी के दिन दीक्षा ग्रहण की।
उन्होंने बताया कि दीक्षा के पश्चात भगवान आदिनाथ ने कठोर तपस्या का मार्ग अपनाया और लंबे समय तक मौन रहकर साधना की। तपस्या के दौरान उन्हें एक वर्ष तक आहार प्राप्त नहीं हुआ, क्योंकि उस समय मुनियों को आहार देने की विधि प्रचलित नहीं थी। अंततः अक्षय तृतीया के दिन हस्तिनापुर में उनके पौत्र राजा श्रेयांश द्वारा गन्ने के रस से उनका प्रथम पारणा कराया गया, जिसे जैन परंपरा में अत्यंत पावन घटना माना जाता है।
आयोजन समिति के अनुसार पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत 25 जून, गुरुवार को भगवान आदिनाथ का ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। रात्रि 8 बजे से देश के ख्यातिप्राप्त कवियों की उपस्थिति में विशेष कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा।
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