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    Homeराजनीतिकर्ज को लेकर पंजाब की राजनीति गरमाई, विपक्ष ने सरकार को घेरा

    कर्ज को लेकर पंजाब की राजनीति गरमाई, विपक्ष ने सरकार को घेरा

    चंडीगढ़। पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में बाजार से ₹13,900 करोड़ का नया कर्ज जुटाने की तैयारी में है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी किए गए लोन इंडिकेटिव कैलेंडर में इस बात का खुलासा हुआ है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पहली तिमाही में ₹9,500 करोड़ के कर्ज का लक्ष्य रखा था, लेकिन वास्तविक रूप से केवल ₹7,800 करोड़ का ही ऋण लिया गया था। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर माना जा रहा है कि सरकार अपनी लोक-कल्याणकारी योजनाओं को वित्तीय गति देने के लिए यह कदम उठा रही है।

    चुनावी वर्ष में नई योजनाओं को 'फाइनेंशियल बूस्ट'

    पंजाब सरकार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपनी प्रमुख योजनाओं के लिए धन की कमी आड़े नहीं आने देना चाहती। इसी कड़ी में 1 जुलाई से 'मावां धीयां सत्कार योजना' की शुरुआत होने जा रही है, जिसके लिए चालू वित्त वर्ष के बजट में ₹9,300 करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, 'मेरी रसोई स्कीम' के तहत राज्य के हर घर में मुफ्त राशन पहुंचाया जा रहा है। वहीं, आगामी 15 अगस्त से राज्य के सरपंचों को वेतन देने का भी फैसला किया गया है, जिससे सरकारी खजाने पर सालाना करीब ₹158 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

    जुलाई से सितंबर तक कर्ज का मासिक खाका

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बाजार से कुल ₹3.18 लाख करोड़ जुटाने हैं, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी 4.35 प्रतिशत है। पंजाब सरकार इस तिमाही में चरणबद्ध तरीके से ऋण उठाएगी, जिसका विवरण इस प्रकार है:

    • जुलाई: सरकार बाजार से सबसे बड़ा हिस्सा यानी ₹5,500 करोड़ का कर्ज लेगी।

    • अगस्त: इस महीने में ₹3,500 करोड़ का ऋण उठाने की योजना है।

    • सितंबर: तिमाही के आखिरी महीने में ₹4,000 करोड़ का लोन लिया जाएगा।

    प्रशासन के मुताबिक, इस राशि का मुख्य उपयोग विकासात्मक परियोजनाओं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए कैपिटल खर्च (पूंजीगत व्यय) के रूप में किया जाएगा।

    हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भी लेंगे बड़ा लोन

    रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के पड़ोसी राज्य भी इस तिमाही में बाजार से बड़ी रकम जुटाने वाले हैं। हरियाणा सरकार इस चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में ₹19,000 करोड़ का कर्ज उठाने जा रही है, जो पंजाब की तुलना में काफी अधिक है। वहीं, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की सरकार इस दौरान केवल ₹2,100 करोड़ का लोन ही बाजार से उठाएगी।

    बढ़ते कर्ज पर विपक्ष हमलावर, सरकार का बचाव

    पंजाब पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों ने इसे आगामी चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाने के संकेत दिए हैं। साल 2022 में पंजाब पर कुल कर्ज ₹2.82 लाख करोड़ से अधिक था, जिसके 31 मार्च 2027 तक बढ़कर ₹4.47 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इस मोर्चे पर विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कहना है कि वर्तमान सरकार को कर्ज विरासत में मिला है, और पुराने कर्ज के ब्याज व किस्तों को चुकाने के लिए ही नया लोन लेना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार पूरी तरह वित्तीय सुधारों की दिशा में काम कर रही है और ऋण केवल निर्धारित कानूनी सीमा के भीतर ही लिया जा रहा है।

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