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    Homeराजनीतिमध्य प्रदेश कांग्रेस में बढ़ी तकरार, अब हाईकमान से लगाई गुहार

    मध्य प्रदेश कांग्रेस में बढ़ी तकरार, अब हाईकमान से लगाई गुहार

    भोपाल: मध्य प्रदेश में पिछले 21 वर्षों से सत्ता से दूर रहने वाली कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अपनों के बीच मचे आंतरिक घमासान के कारण सुर्खियों में है। जमीनी मुद्दों पर सरकार को घेरने के बजाय पार्टी के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी रार खुलकर सामने आ रही है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित यूथ कांग्रेस की बैठक में नेताओं के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति बन गई। इस घटनाक्रम के बाद जहां एक ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय आलाकमान से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुख्य विपक्षी दल पर तीखे तंज कसे हैं।

    यूथ कांग्रेस की बैठक में हाथापाई, राजनीतिक मामलों की समिति में उठे सवाल

    मंगलवार को राजधानी भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में यूथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी की समीक्षा बैठक चल रही थी। इसी दौरान ऐप आधारित मूल्यांकन (App-based Evaluation) को लेकर प्रदेश सचिव सलमान गौरी और मऊगंज जिला अध्यक्ष आशुतोष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति निर्मित हो गई, जिसे देख प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया और अन्य पदाधिकारियों को बीच-बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा। इसी दिन आयोजित कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (Political Affairs Committee) की वर्चुअल बैठक में भी पार्टी के अंदरूनी विरोधाभास पर वरिष्ठ नेताओं ने गहरी नाराजगी जताई।

    जमीन आवंटन विवाद: जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बयान आमने-सामने

    कांग्रेस के भीतर हालिया विवाद की मुख्य जड़ उज्जैन में वीर भारत न्यास को ₹1 सालाना की लीज पर 500 एकड़ सरकारी जमीन आवंटित किए जाने का मामला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, इसके महज दो दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जीतू पटवारी के दावों के विपरीत बयान दे दिया। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वीर भारत न्यास एक सरकारी ट्रस्ट है और मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं, इसलिए इस आवंटन को भ्रष्टाचार कहना उचित नहीं है। एक ही मुद्दे पर दोनों बड़े नेताओं के अलग-अलग बयानों ने पार्टी कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है।

    पूर्व विधायकों और विधायकों ने उठाए सवाल, अरुण यादव ने राहुल गांधी को लिखा पत्र

    नेताओं के इस विरोधाभास पर पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। ग्वालियर से कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने दोटूक कहा कि अगर वरिष्ठ नेता ही प्रदेश अध्यक्ष के स्टैंड के खिलाफ बोलेंगे, तो पार्टी जनता के बीच क्या संदेश लेकर जाएगी। वहीं, भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे माहौल में कार्यकर्ता असमंजस में हैं कि वे किस नेता की बात को सच मानें।

    इस आंतरिक कलह से व्यथित होकर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को टैग करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा कि जब निष्ठावान कार्यकर्ता जमीन पर संघर्ष कर रहा है, तब कुछ लोग व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से मध्य प्रदेश कांग्रेस में तुरंत हस्तक्षेप करने और संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करने की मांग की।

    बीजेपी का तंज: गुटों और गिरोहों में बंटी है कांग्रेस

    कांग्रेस की इस अंतर्कलह पर तंज कसने में भाजपा ने भी देर नहीं की। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी अपने शीर्ष नेताओं को एक मंच पर नहीं ला सकती, वह प्रदेश की जनता को क्या दिशा देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह से गुटों और गिरोहों में बंटी हुई पार्टी है, जिसके नेता जनता के हितों के बजाय केवल अपनी व्यक्तिगत लड़ाई लड़ने में व्यस्त हैं।

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