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    50 हजार रुपये चुकाने की कीमत बनी बेटी, दो साल तक होता रहा अमानवीय शोषण

    बूंदी। जयपुर कंट्रोल रूम को पुख्ता सूचना मिली थी कि क्षेत्र के शंकरपुरा गांव में नाबालिग लड़कियों से अनैतिक गतिविधियां कराई जा रही हैं। इस इनपुट पर दबलाना थाना पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) की संयुक्त टीम ने एक विशेष रणनीति बनाई। टीम के सदस्य सामान्य ग्राहक बनकर संदिग्ध ठिकाने पर पहुंचे। वहां मौजूद महिला ने जैसे ही किशोरी को आगे किया, पुलिस टीम ने तुरंत दबिश देकर बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में ले लिया।

    आर्थिक तंगी और कर्ज का खौफनाक अंजाम

    बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार के अनुसार, रेस्क्यू की गई किशोरी की काउंसलिंग की जा रही है। पीड़िता ने बताया कि करीब डेढ़-दो साल पहले परिवार भीषण आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। साहूकार के भारी दबाव और महज 50 हजार रुपये के कर्ज के कारण माता-पिता ने उसे गांव की ही एक महिला कमला के पास भेज दिया था। इसके बाद से ही किशोरी से उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन गलत काम कराए जा रहे थे। फिलहाल पीड़िता को सुरक्षित आश्रय गृह में रखकर मेडिकल और काउंसलिंग सहायता दी जा रही है। बाल कल्याण समिति अब उसकी आगे की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के प्रयास में जुटी है।

    मुख्य आरोपी महिला फरार, दो दलाल गिरफ्तार

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो (POCSO) एक्ट और अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम के तहत कड़ा मुकदमा दर्ज किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो दलालों, सुरेश और रमेश को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, मुख्य आरोपी महिला कमला अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर है, जिसकी तलाश में कोटा और भीलवाड़ा समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

    बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का अंदेशा, मां-बाप भी नामजद

    पूछताछ के दौरान किशोरी के पिता ने कबूल किया है कि कर्ज के दलदल और साहूकार की प्रताड़ना के चलते ही उसने यह कदम उठाया था। पुलिस ने इस घिनौने कृत्य में शामिल होने के आरोप में माता-पिता के खिलाफ भी पॉक्सो और मानव तस्करी की धाराओं में केस दर्ज किया है। मौके से जब्त किए गए मोबाइल फोन से पुलिस को कई अन्य नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें भी मिली हैं, जिससे किसी बड़े अंतर-जिला मानव तस्करी रैकेट के शामिल होने का अंदेशा है। पुलिस कोटा-भीलवाड़ा कनेक्शन के साथ-साथ सभी कड़ियों को जोड़कर गहन जांच कर रही है।

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