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    ‘साउथ कोरिया अगला चांदी बन रहा है’, राधिका गुप्ता ने निवेशकों को किया सतर्क

    मुंबई: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं के बीच हर निवेशक इस उलझन में है कि अपनी गाढ़ी कमाई को कहां सुरक्षित रखें। क्या इस समय शेयर बाजार में पैसा बढ़ाना चाहिए, सोना खरीदना चाहिए या फिर विदेशी बाजारों का रुख करना चाहिए? इन सभी महत्वपूर्ण सवालों पर एडलवाइज म्यूचुअल फंड की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ (CEO) राधिका गुप्ता ने खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने नए निवेशकों को 'फोमो' (FOMO – छूट जाने का डर) से बचने की सलाह देते हुए एक बेहतरीन निवेश फॉर्मूला साझा किया है।

    ग्लोबल इन्वेस्टिंग: भेड़चाल से बचें, सही वजह से निवेश करें

    पिछले कुछ समय से कई विदेशी बाजारों (जैसे साउथ कोरिया) में आई तेजी को देखकर भारतीय निवेशक वहां पैसा लगाने के लिए उतावले हो रहे हैं। इस पर राधिका गुप्ता ने सचेत करते हुए कहा कि किसी देश के सिर्फ हालिया रिटर्न को देखकर वहां पैसा नहीं झोंकना चाहिए। ग्लोबल इन्वेस्टिंग का असली मकसद पोर्टफोलियो को विविधता (Diversification) देना और रुपये की कमजोरी के खिलाफ सुरक्षा पाना होना चाहिए। निवेशकों को केवल उन्हीं थीम्स या सेक्टर्स के लिए विदेशी बाजारों का रुख करना चाहिए जो फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं हैं।

    भारतीय बाजार का आउटलुक: साल की दूसरी छमाही होगी दमदार

    भारतीय शेयर बाजार को लेकर उनका नजरिया काफी सकारात्मक है। उनका मानना है कि भारत से जुड़ी ज्यादातर भू-राजनीतिक चिंताएं और अनिश्चितताएं अब खत्म हो चुकी हैं। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के कॉर्पोरेट नतीजे ऊंचे कच्चे तेल की वजह से शायद बहुत ज्यादा चमकीले न रहें, लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही से कंपनियों की कमाई में बड़ी रिकवरी दिखने लगेगी। कुल मिलाकर, साल का दूसरा हिस्सा पहले हिस्से के मुकाबले निवेशकों के लिए कहीं ज्यादा मजबूत और दिलचस्प रहने की उम्मीद है।

    पसंदीदा सेक्टर्स और मल्टी-कैप अप्रोच

    बाजार में बने रहने के लिए राधिका गुप्ता ने 'मल्टी-कैप' नजरिया अपनाने की सलाह दी है। सारा पैसा केवल बड़ी कंपनियों (Large-Cap) में लगाने के बजाय मध्यम (Mid-Cap) और छोटी कंपनियों (Small-Cap) में भी बांटना चाहिए, क्योंकि नई टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल मार्केट्स और डेटा सेंटर्स जैसी बेहतरीन थीम्स यहीं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उनके खुद के पोर्टफोलियो का करीब 70% हिस्सा इक्विटी में है, जिसमें वे मल्टी-कैप फंड्स को चुनती हैं। सेक्टर्स की बात करें तो वे इस समय प्राइवेट बैंक, पावर, डिफेंस और प्रीमियम कंजम्पशन (महंगे प्रोडक्ट्स की खपत) को काफी पसंद कर रही हैं।

    नए निवेशकों के लिए ₹10 लाख का फॉर्मूला और गोल्ड स्ट्रेटेजी

    यदि कोई निवेशक पहली बार बाजार में आ रहा है और उसके पास ₹10 लाख की एकमुश्त रकम है, तो उन्हें सीधे शुद्ध इक्विटी के बजाय हाइब्रिड फंड्स (जैसे बैलेंस्ड एडवांटेज या एग्रेसिव हाइब्रिड फंड) से शुरुआत करनी चाहिए। ये फंड्स गिरावट के समय सेफ्टी नेट का काम करते हैं, जिससे नया निवेशक घबराकर बाजार से बाहर नहीं भागता।

    सोने-चांदी पर राय रखते हुए उन्होंने कहा:

    "सोना और चांदी आपके पोर्टफोलियो के रक्षक हैं, इन्हें वेल्थ क्रिएटर (दौलत बढ़ाने वाला) मानकर दांव न लगाएं। अपने पोर्टफोलियो का 10 से 15% हिस्सा सोने में रखना स्थिरता के लिए बिल्कुल सही है, और इसके लिए एसआईपी (SIP) का रास्ता सबसे बेहतर है।"

    अंत में, आजकल चर्चा में चल रहे स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) को लेकर उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक आप किसी प्रोडक्ट की रणनीति, उसके रिस्क और फंड मैनेजर के अनुभव को पूरी तरह समझ न लें, तब तक सिर्फ फैंसी नाम देखकर उसमें पैसा कतई न फंसाएं।

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