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    चढ़ावा चोरी पर सख्त एक्शन! आरोपियों के घरों पर बुलडोजर की तैयारी, महंत ने उठाए सवाल

    अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Scam) के मामले में अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर ही बड़ी अंतर्कलह और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पहली बार ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने खुलकर पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में गलती गोपाल राव की है, जो राम की परंपरा को न मानकर केवल राजनीति कर रहे हैं और सबको उलझा रहे हैं। बता दें कि मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले गोपाल राव मंदिर के निर्माण प्रभारी और ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य थे।

    आरोपियों के अवैध मकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

    सूत्रों के मुताबिक, इस महाघोटाले के आरोपियों पर उत्तर प्रदेश सरकार बेहद कड़ा एक्शन लेने की तैयारी में है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने ऐसे नए मकानों और संपत्तियों की पहचान कर ली है, जिन्हें आरोपियों ने मंदिर में नौकरी लगने के बाद बनवाया था। प्राधिकरण आज ही उन मकानों को नोटिस भेज सकता है जिनका नक्शा पास नहीं है या जिन्होंने निर्माण नियमों का उल्लंघन किया है। मुख्य रूप से आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज में बन रहा मकान और अनुकल्प मिश्रा का कौशलपुरी स्थित आवास प्रशासन के रडार पर हैं, जिन पर जल्द ही बुलडोजर चल सकता है।

    ट्रस्टी अनिल मिश्रा से आज पूछताछ संभव, चंपत राय से हो चुका है सवाल-जवाब

    चोरी के इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही पुलिस और एसआईटी (SIT) की टीम कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। ३० जून को अयोध्या जेल में बंद मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ के बाद, पुलिस अब ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। रविवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से करीब ३ घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है। अब उनके बयानों को क्रॉस-वेरिफाई (सत्यापित) करने के लिए ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से आज पूछताछ की जा सकती है। पुलिस विशेष रूप से आरोपी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा की नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों में उनकी भूमिका की पड़ताल करेगी।

    घटनाक्रम और अब तक की बड़ी कार्रवाइयां

    • ७ जून: पहली बार राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया।

    • १३ जून: उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया।

    • २५ जून: आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत ८ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

    • इस्तीफे: बदनामी और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इसी दिन (२५ जून) मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

    नोटों की गड्डियों का वीडियो वायरल, राजनीतिक बयानबाजी तेज

    इसी बीच, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह अपने हाथों में नोटों की बड़ी-बड़ी गड्डियां लिए दिखाई दे रहा है। पुलिस इस वीडियो की प्रामाणिकता और पैसों के स्रोत की सघन जांच कर रही है।

    इस मामले पर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग ५०० वर्षों के संघर्ष के बाद बने राम मंदिर में आज तक दर्शन करने नहीं गए, उन्हें इस पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष जांच के लिए ही एसआईटी का समय बढ़ाया गया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि यह बेहद गंभीर और भावनात्मक रूप से आहत करने वाला अपराध है, लेकिन एसआईटी की जांच से जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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