बॉलीवुड के दिग्गज सुपरस्टार सलमान खान एक बार फिर कानूनी दांव-पेच में घिरते नजर आ रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने सूबे के कैंडोलिम तटीय इलाके में अभिनेता से संबद्ध एक हाई-प्रोफाइल हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर दायर की गई जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए अभिनेता और उनसे जुड़ी कंपनियों सहित संबंधित विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जनहित याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बनाए गए 'कोस्टल रेगुलेशन जोन' (CRZ) के कड़े नियमों को ताक पर रखकर और पर्यावरण कानूनों का सरेआम उल्लंघन करके इस संवेदनशील इलाके में आलीशान रिहायशी विला का निर्माण किया गया है।
पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में अवैध निर्माण के आरोप
'कैलांगुट निर्वाचन क्षेत्र फोरम' नामक एक स्थानीय सामाजिक संस्था की ओर से अदालत में पेश की गई इस याचिका में इस पूरे प्रोजेक्ट की कानूनी वैधता और स्वीकृतियों पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जहां इन रिहायशी विला और उनके साथ मिलने वाली लग्जरी आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया गया है, वह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहद नाजुक और 'नो डेवलपमेंट जोन' के अंतर्गत आता है। इस तरह के संवेदनशील तटीय बेल्ट में किसी भी प्रकार की भारी व्यावसायिक या रिहायशी निर्माण गतिविधियों पर सरकारी स्तर से पूरी तरह से पाबंदी लागू है।
कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर के रूप में सामने आया सलमान खान का नाम
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अदालती दस्तावेज में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि सलमान खान के मालिकाना हक या हिस्सेदारी वाली कंपनी 'क्लासिक सिटी इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड' ने सिंकुवेरिम नदी के 'हाई टाइड लाइन' (ज्वारभाटा क्षेत्र) से महज 55 मीटर की दूरी पर आलीशान विला और बड़े स्विमिंग पूल का निर्माण कराया है। याचिका में साक्ष्यों का हवाला देते हुए यह भी दावा किया गया है कि मशहूर बॉलीवुड अभिनेता खुद इस रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को संचालित करने वाली मूल कंपनी के मुख्य मैनेजिंग पार्टनर हैं, जिसके कारण इस मामले में उनकी सीधी कानूनी जवाबदेही बनती है।
नक्शे और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट में हेरफेर का दावा
याचिका में केवल जगह को लेकर ही नहीं, बल्कि निर्माण के तरीके पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मौके पर जो कंस्ट्रक्शन किया गया है, वह प्रशासन द्वारा स्वीकृत किए गए मूल बिल्डिंग प्लान (मानचित्र) से पूरी तरह अलग और हटकर है। इसके साथ ही, स्थानीय कैंडोलिम ग्राम पंचायत द्वारा 30 अप्रैल, 2025 को इस प्रोजेक्ट के लिए जारी किए गए 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' (पूर्णता प्रमाण पत्र) को भी अदालत में सीधी चुनौती दी गई है। आरोप है कि इस सर्टिफिकेट को मंजूरी देते समय प्रशासनिक अधिकारियों ने जानबूझकर कई बड़ी कमियों और नियमों की अनदेखी की।
मंत्रालय सहित कई बड़ी सरकारी एजेंसियां बनाई गईं प्रतिवादी
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की फाइलों की दोबारा जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि क्या इसके निर्माण से पहले जरूरी पर्यावरणीय मंजूरियां ली गई थीं या नहीं। इस याचिका में न्यायसंगत कार्रवाई के लिए कई बड़ी सरकारी और प्रशासनिक इकाइयों को प्रतिवादी (पक्षकार) बनाया गया है। इनमें गोवा सरकार, गोवा कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (GCZMA), स्थानीय कैंडोलिम ग्राम पंचायत, भारत सरकार का पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा खुद सलमान खान एंड कंपनी शामिल हैं।
हाई कोर्ट सख्त, सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का अल्टीमेटम
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने इस जनहित याचिका में उठाए गए पर्यावरण सुरक्षा के मुद्दों को बेहद गंभीर माना है। अदालत ने मामले की शुरुआती सुनवाई के बाद सलमान खान की कंपनी और पर्यावरण मंत्रालय सहित सभी प्रतिवादियों को अपना आधिकारिक रुख साफ करने के लिए कानूनी नोटिस जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना विस्तृत जवाब और स्पष्टीकरण हलफनामे के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के जवाबों की समीक्षा के बाद हाई कोर्ट इस विवादित विला प्रोजेक्ट के भविष्य पर अपना अगला आदेश सुनाएगा।


