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    बारिश के बाद बढ़ा डेंगू का खतरा, भोपाल के 1.5 लाख खाली प्लॉट चिंता का कारण

    भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का खतरा एक बार फिर तेजी से पैर पसारने लगा है। बीते एक सप्ताह के भीतर शहर में डेंगू के पांच नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों का आंकड़ा 44 पर पहुंच गया है। इस डराने वाले आंकड़े के साथ ही भोपाल अब पूरे प्रदेश में डेंगू के मरीजों के मामले में दूसरे पायदान पर आ खड़ा हुआ है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के लिए असल सिरदर्दी मरीजों की यह संख्या नहीं, बल्कि शहर में मौजूद करीब डेढ़ लाख खाली प्लॉट हैं, जो इस मानसूनी सीजन में मच्छरों के लिए सबसे सुरक्षित आशियाना बन रहे हैं।

    लाखों खाली प्लॉट बने मुसीबत, अमले की भारी कमी

    शहर में डेंगू फैलने की सबसे बड़ी वजह यहां के खाली पड़े वो भूखंड (प्लॉट) हैं, जहां बारिश का साफ पानी जमा हो रहा है। यही ठहरा हुआ साफ पानी डेंगू के वाहक 'एडीज' मच्छरों का पसंदीदा प्रजनन स्थल बन जाता है। स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन 1.5 लाख प्लॉटों में लार्वा की जांच करने और उसे खत्म करने की है। विडंबना यह है कि पांच साल पहले जब शहर में महज 5,000 खाली प्लॉट थे, तब विभाग के पास 135 सर्वे टीमें थीं। वहीं आज जब प्लॉटों की संख्या बढ़कर डेढ़ लाख हो चुकी है, तब लार्वा खोजने वाली टीमों की संख्या घटकर सिर्फ 44 रह गई है। इस कमी को दूर करने के लिए विभाग ने नगर निगम से खाली प्लॉटों का ताजा रिकॉर्ड मांगा है।

    इन इलाकों में पैर पसार रहा है डेंगू, विशेष निगरानी शुरू

    भोपाल के पॉश और विकसित हो रहे इलाकों में डेंगू का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इनमें साकेत नगर, कटारा हिल्स, बागसेवनियां और अवधपुरी प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं, जहां शहर के कुल मरीजों के करीब 25 फीसदी मामले अकेले दर्ज किए गए हैं। इन क्षेत्रों में प्रशासन ने विशेष लार्वा सर्वे और निगरानी अभियान छेड़ दिया है। इसके अलावा कमलानगर, लालघाटी, शिवलोक, विजय नगर, गोविंदपुरा, बरखेड़ी कलां, शाहजहानाबाद, शहीद नगर, सर्वधर्म, साईनाथ कॉलोनी, कान्हाकुंज, राजहर्ष कॉलोनी और ललिता नगर से भी संक्रमित मरीज सामने आए हैं।

    रीवा पहले नंबर पर, भोपाल में पिछले साल से ज्यादा केस

    अगर पूरे मध्य प्रदेश की स्थिति पर नजर डालें, तो रीवा जिला 79 मरीजों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है। रीवा के बाद भोपाल (44 मरीज) दूसरे स्थान पर है। इसके बाद क्रमशः ग्वालियर (36), इंदौर (30) और जबलपुर (24) का नंबर आता है। चिंता की बात यह भी है कि पिछले साल जुलाई के शुरुआती हफ्ते तक भोपाल में डेंगू के 42 मामले थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा अभी से 44 को पार कर चुका है, जो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने का संकेत है।

    टास्क फोर्स का गठन, स्वास्थ्य अधिकारियों ने कसी कमर

    बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. हिमांशु जायसवाल ने भोपाल समेत प्रदेश के सभी प्रभावित जिलों में 'डेंगू नियंत्रण टास्क फोर्स' गठित करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) भोपाल, डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और लार्वा नष्ट करने के काम में तेजी ला दी गई है।

    सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव, इन बातों का रखें ध्यान

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू एक ऐसी बीमारी है जिससे जागरूकता के जरिए आसानी से बचा जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि मच्छरों को पनपने का मौका ही न दिया जाए:

    • घर के भीतर, छत पर, बालकनी या आंगन में कहीं भी पानी जमा न होने दें।

    • कूलरों, गमलों के नीचे रखी ट्रे और पानी की टंकियों को हर हफ्ते खाली कर साफ करें।

    • घर के आसपास जलभराव होने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या नगर निगम को सूचित करें।

    • यदि अचानक तेज बुखार, बदन दर्द या आंखों के पीछे दर्द की शिकायत हो, तो खुद डॉक्टर बनने (सेल्फ-मेडिकेशन) से बचें और तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर खून की जांच करवाएं।

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