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    लिव-इन पर सख्ती! साथ रहने से लेकर अलग होने तक अपनानी होगी कानूनी प्रक्रिया

    भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में यूसीसी का मसौदा (ड्राफ्ट) लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई कड़े और नए नियम शामिल किए गए हैं। इस ड्राफ्ट का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब राज्य में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों (कपल्स) के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, इस रिश्ते को समाप्त करने की कानूनी प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। सरकार और विधि विभाग द्वारा फाइनल किए गए इस मसौदे पर गुरुवार को दिल्ली में यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई के साथ अंतिम दौर की चर्चा होगी, जिसके बाद इसे आगामी मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जा सकता है।

    रिश्ता खत्म करने के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन रद्द

    मसौदे के कड़े प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया है और वह भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति से शादी करना चाहता है, तो उसे विवाह बंधन में बंधने से पहले अपना लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से रद्द कराना होगा। इस रजिस्ट्रेशन को खत्म करने के लिए दोनों पक्षों की रजामंदी होना जरूरी नहीं होगा; कोई भी एक पक्ष आवेदन देकर इसे निरस्त करा सकता है। हालांकि, यदि दूसरा पक्ष इस फैसले से असहमत होता है, तो उसे अदालत में चुनौती देने का अधिकार होगा।

    सिर्फ बालिगों का होगा पंजीकरण, गुजरात-उत्तराखंड से सरल होगा ड्राफ्ट

    नए नियमों के मुताबिक, केवल बालिग (18 वर्ष या उससे अधिक आयु के) लोग ही लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए जिले के रजिस्ट्रार के पास दोनों पक्षों को अपनी उम्र और पहचान से जुड़े वैध दस्तावेज जमा करने होंगे। सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश का यूसीसी कानून गुजरात और उत्तराखंड के मुकाबले काफी सरल और संक्षिप्त होगा। उदाहरण के तौर पर, इसमें उत्तराधिकार (संपत्ति के अधिकार) से जुड़े प्रावधानों को करीब 100 से घटाकर मात्र 30 कर दिया गया है। साथ ही, आदिवासी, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों को पहले की तरह ही इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

    बिना रजिस्ट्रेशन अलग से आपराधिक केस नहीं, पर शादीशुदा के लिए कड़े नियम

    इस मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई कपल लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उसके खिलाफ अलग से कोई दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह पूरी व्यवस्था काफी हद तक सामाजिक जागरूकता पर आधारित रहेगी। हालांकि, यदि कोई पहले से विवाहित (शादीशुदा) व्यक्ति किसी अन्य के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो ऐसे मामलों में देश में पहले से लागू आपराधिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।

    प्रावधानों को कोर्ट में चुनौती मिलने की आशंका

    लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बनाए गए इन नए नियमों पर सियासी और कानूनी गलियारों में सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी के साथ लिव-इन में है और वह जानकारी छुपाकर किसी दूसरे के साथ नया रजिस्ट्रेशन करा लेता है, तो उसे ट्रैक करने की स्पष्ट व्यवस्था फिलहाल ड्राफ्ट में साफ नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, यदि यह विधेयक मानसून सत्र में पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो इसके लिव-इन और उत्तराधिकार से जुड़े कुछ प्रावधानों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

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