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    चंबल के पुनर्जीवन की कहानी छह पुस्तकों में, सोलापुर में हुआ लोकार्पण

    जल, समाज और संस्कृति पर आधारित चंबल की प्रेरक यात्रा को हिंदी, मराठी और अंग्रेजी में मिला दस्तावेजी स्वरूप

    अलवर। चंबल क्षेत्र में जल संरक्षण, सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रेरक यात्रा अब पुस्तकों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचेगी। तरुण भारत संघ द्वारा चंबल क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित छह पुस्तकों का लोकार्पण 4 जुलाई को महाराष्ट्र के सोलापुर स्थित एमआईटी विश्व प्रयाग विश्वविद्यालय तथा सकाल समूह के संवाद सभा भवन में आयोजित समारोह में किया गया।

    इन पुस्तकों का उद्देश्य चंबल क्षेत्र में जल संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक परिवर्तन की यात्रा को व्यापक स्तर पर दस्तावेजी स्वरूप प्रदान करना है। छह पुस्तकों में तीन का प्रकाशन सकाल प्रकाशन, पुणे, दो का प्रकाशन एमआईटी विश्व प्रयाग विश्वविद्यालय तथा एक पुस्तक का प्रकाशन शिक्षिका रीता रॉड्रिक्स द्वारा किया गया है।

    सकाल प्रकाशन की ओर से प्रकाशित पुस्तकों में ‘माणूस आणि निसर्ग’ (मराठी), ‘मानव और प्रकृति’ (हिंदी) तथा ‘Earth and Humanity’ (अंग्रेजी) शामिल हैं। इन पुस्तकों की परिकल्पना सकाल समूह के अध्यक्ष अभिजीत पवार की चंबल यात्रा के बाद साकार हुई। तीनों पुस्तकों का संपादन श्रीराम पवार ने किया है। मराठी संस्करण का संपादन महेंद्र महाजन ने, हिंदी संस्करण का लेखन जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने तथा अंग्रेजी संस्करण का अनुवाद सकाल समूह की वरिष्ठ पत्रकार ने किया।

    दूसरी श्रृंखला में ‘पुनर्जीवित बदह नदी’ के हिंदी और मराठी संस्करण एमआईटी विश्व प्रयाग विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित किए गए। हिंदी पुस्तक के लेखक राजेंद्र सिंह हैं, जबकि मराठी एवं अंग्रेजी संस्करण का अनुवाद और प्रकाशन रीता रॉड्रिक्स ने किया।

    कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी राजेंद्र शिंदे ने पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए कहा कि ये पुस्तकें केवल जल संरक्षण की नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक पुनर्जागरण की प्रेरक गाथा हैं। उन्होंने कहा कि चंबल में आया सकारात्मक परिवर्तन महिलाओं के नेतृत्व, साहस और सामुदायिक भागीदारी का परिणाम है।

    महाराष्ट्र प्रशासन अकादमी (यशदा) के महासंचालक सुभाष दिवसे ने कहा कि ये पुस्तकें बड़े बांधों से विस्थापित लोगों के संघर्ष और उनके पुनर्निर्माण की यात्रा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि चंबल क्षेत्र में हिंसा छोड़कर खेती और जल संरक्षण को अपनाने का परिवर्तन समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

    जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि चंबल में बदलाव की वास्तविक नायक महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं ने जल संरक्षण, भूमि सुधार और खेती को अपनाकर परिवारों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी। उनके अनुसार इस अभियान से 6,332 लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया और पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि तथा सामाजिक सौहार्द का वातावरण विकसित हुआ।

    उन्होंने बताया कि वर्तमान में तरुण भारत संघ चंबल क्षेत्र की 23 छोटी नदियों के पुनर्जीवन का कार्य कर रहा है। वर्षा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के प्रयासों से सूख चुकी कई नदियां पुनः प्रवाहित होने लगी हैं, जिससे खेती, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

    कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शेखर गायकवाड़ ने भूजल पुनर्भरण और नदी पुनर्जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मल्लिकार्जुन कलशेट्टी ने तरुण भारत संघ की जल संरक्षण पहल को जनभागीदारी और जल चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

    समारोह के अंत में राजेंद्र सिंह ने कहा कि चंबल में दिखाई देने वाला परिवर्तन महिलाओं के साहस, श्रम और विश्वास का परिणाम है। उनके प्रयासों ने पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सामाजिक पुनर्जागरण की मजबूत आधारशिला रखी है।

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