More
    Homeखेलअर्नव पापरकर ने रचा इतिहास, 36 साल बाद विंबलडन जूनियर क्वार्टर फाइनल...

    अर्नव पापरकर ने रचा इतिहास, 36 साल बाद विंबलडन जूनियर क्वार्टर फाइनल में पहुंचा कोई भारतीय

    भारतीय टेनिस के लिए विंबलडन के जूनियर वर्ग से एक गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। 18 वर्षीय युवा खिलाड़ी अर्नव पापरकर ने जूनियर बॉयज सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर इतिहास रच दिया है। पिछले 36 वर्षों में इस स्तर तक पहुंचने वाले वे पहले भारतीय बन गए हैं। इस उपलब्धि से पहले वर्ष 1990 में लिएंडर पेस ने यह कारनामा कर दिखाया था, जिन्होंने उसी वर्ष जूनियर विंबलडन का खिताब भी जीता था। अर्नव ने प्री-क्वार्टर फाइनल में जापान के रियो तबाता को मात्र 52 मिनट में सीधे सेटों में 6-2, 6-1 से पराजित कर अंतिम-8 में अपनी जगह पक्की की।

    पुणे से वैश्विक स्तर तक का सफर

    महाराष्ट्र के पुणे निवासी अर्नव वर्तमान में आईटीएफ जूनियर रैंकिंग में 19वें स्थान पर हैं। उनकी टेनिस यात्रा पुणे की हेमंत बेंद्रे टेनिस अकादमी से शुरू हुई और अब वे स्पेन की सोटो अकादमी में भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और कॉर्पोरेट प्रायोजकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। अर्नव ने 2023 में ऑस्ट्रेलियन ओपन अंडर-14 एशिया-पैसिफिक एलीट ट्रॉफी और राष्ट्रीय अंडर-16 चैंपियन बनकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। इसके बाद 2024 में प्रोफेशनल टेनिस में कदम रखने और 2025 में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतने के बाद वे लगातार एआईटीए अंडर-18 रैंकिंग में शीर्ष पर बने रहे।

    मैदान पर अदम्य साहस और मानसिक मजबूती

    विंबलडन में अर्नव का प्रदर्शन बेहद आक्रामक रहा है। दूसरे दौर में जूनियर विश्व नंबर-3 खिलाड़ी को मात देने के बाद रियो तबाता के खिलाफ उनकी जीत विशेष मानी जा रही है, क्योंकि वे पहले दो बार तबाता से हार चुके थे। अर्नव ने अपनी सर्विस में किए गए तकनीकी सुधारों का श्रेय अपने कोच हेमंत बेंद्रे को दिया है। उनका कहना है कि स्विंग में संतुलन लाने और मानसिक रूप से शांत रहने के अभ्यास ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी जीत दिलाने में मदद की है। मैच के दौरान आठ ऐस लगाना और अपनी सर्विस पर दबदबा बनाए रखना उनकी शानदार लय को दर्शाता है।

    इतिहास की दहलीज पर भारतीय टेनिस

    अर्नव पापरकर अब लिएंडर पेस, रमणाथन कृष्णन और रमेश कृष्णन जैसे महान खिलाड़ियों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। 2009 में युकी भांबरी के बाद किसी जूनियर ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले वे पहले भारतीय हैं। रोलां गैरो जूनियर चैंपियनशिप में तीसरे दौर तक का सफर तय करने के बाद उनकी विश्व रैंकिंग टॉप-20 में पहुंच गई है। अर्नव का यह प्रदर्शन न केवल उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है, बल्कि भारतीय टेनिस के लिए भी एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है। अब सबकी निगाहें उनके आगामी मैचों पर टिकी हैं।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here