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    ‘मोटी होने की वजह से मिला अक्षय कुमार की फिल्म में रोल’, अंजलि आनंद का बड़ा खुलासा

    मुंबई: टेलीविजन से लेकर सिल्वर स्क्रीन तक अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली मशहूर अभिनेत्री अंजलि आनंद इन दिनों अपनी हालिया रिलीज ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धमाल 4’ की सफलता को लेकर लगातार मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई हैं। इसी बीच, एक बेबाक इंटरव्यू के दौरान अंजलि आनंद ने फिल्म इंडस्ट्री के भीतर प्लस-साइज (सामान्य से अधिक वजन वाले) कलाकारों को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच (स्टीरियोटाइपिंग) पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं।

    अंजलि ने कड़े शब्दों में उजागर किया कि कैसे मुख्यधारा की फिल्मों में भारी शरीर वाले कलाकारों को केवल हंसी का पात्र बनाने या बेहद सामान्य किरदारों में कॉमेडी का तड़का लगाने के लिए ही साइन किया जाता है। उन्होंने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'बेल बॉटम' में अपने काम करने के पीछे की एक बेहद कड़वी सच्चाई साझा की, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया है। अंजलि ने बताया कि जब दर्शक या मेकर्स उनके अभिनय कौशल को नजरअंदाज कर केवल उनके वजन और शरीर की बनावट का मजाक उड़ाते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत गहरा आघात पहुंचता है।

    'बेल बॉटम' में रोल मिलने का चौंकाने वाला सच; टैलेंट के बजाय शरीर के आकार पर जज करती है इंडस्ट्री

    अंजलि आनंद ने अपनी बातचीत में अक्षय कुमार अभिनीत स्पाई-थ्रिलर फिल्म 'बेल बॉटम' के सेट से जुड़ा एक बेहद विचलित करने वाला अनुभव साझा किया:

    • आतंकवादी को गिराने के लिए मिली कास्टिंग: अंजलि ने साफ शब्दों में कहा, "अक्षय कुमार की उस फिल्म में मेरी मौजूदगी का सिर्फ एक ही तकनीकी कारण था कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण सीन में आतंकवादी (टेररिस्ट) मुझ पर गिर सके और उसे काबू में किया जा सके। मुझे वह रोल मेरी बेहतरीन एक्टिंग की वजह से नहीं, बल्कि केवल इसलिए मिला क्योंकि मेरा वजन ज्यादा है और मैं मोटी दिखती हूं।"

    • ब्यूटी स्टैंडर्ड्स पर साधा निशाना: अंजलि ने आगे कहा कि यह बेहद दुखद है कि लोग आपके अभिनय के स्तर को परखने के बजाय सबसे पहले आपके शारीरिक मापदंडों को देखते हैं। उन्होंने कहा, "फिल्म जगत के कथित तय पैमानों के हिसाब से मैं कभी फिट नहीं बैठती, लेकिन सच तो यह है कि इन लोगों के अजीबो-गरीब पैमानों के लिए तो दीपिका पादुकोण और ऐश्वर्या राय जैसी खूबसूरत अभिनेत्रियां भी कभी-कभी कम पड़ जाती हैं।"

    • दिग्गजों की आलोचना का दिया उदाहरण: उन्होंने कहा कि आलोचना करने वाले तो शाहरुख खान और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन तक को नहीं छोड़ते। ये ऐसे लोग हैं जो केवल सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर अपनी नकारात्मक राय देना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा करने की आजादी है, लेकिन ऐसे लोगों की खोखली सोच कभी भी आपकी वास्तविक काबिलियत और सच्चाई को बदल नहीं सकती।

    'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' ने तोड़ा वर्षों पुराना रूढ़िवादी ढांचा; बॉडी शेमिंग के खिलाफ बुलंद की आवाज

    अपनी बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अंजलि आनंद ने बताया कि निर्देशक करण जौहर की फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' ने उनके करियर को एक नई पहचान दी, लेकिन साथ ही इंडस्ट्री ने उन्हें एक खास तरह के रोल में बांधना (टाइपकास्ट करना) भी शुरू कर दिया:

    • बदली फिल्मों में मोटी लड़कियों की परिभाषा: अंजलि ने कहा, "इस फिल्म से पहले हिंदी सिनेमा में मोटी लड़की का किरदार सिर्फ उसी लड़की को दिया जाता था जो पूरे समय स्क्रीन पर सिर्फ खाना खाती रहती थी, पिज्जा-बर्गर उड़ाती थी और केवल कॉमेडी सीन या किसी के टकराकर गिरने के सीन के लिए इस्तेमाल होती थी। किसी भी फिल्म में पहले कभी किसी प्लस-साइज इंसान को आत्मसम्मान के साथ अपनी बात मजबूती से रखते हुए नहीं दिखाया गया था। लेकिन 'रॉकी और रानी…' में मेरे किरदार ने पहली बार बॉडी शेमिंग के खिलाफ खुलकर स्टैंड लिया।"

    • ट्रोलिंग का रहता है डर: अंजलि ने स्वीकार किया कि जब उन्हें अचानक इतनी बड़ी लाइमलाइट और अटेंशन मिलता है, तो वे थोड़ा डर भी जाती हैं। उन्हें लगता है कि इस अटेंशन के साथ ही सोशल मीडिया के कुछ नफरत फैलाने वाले लोग (ट्रोल्स) भी सक्रिय हो जाएंगे और उनके बारे में भद्दे कमेंट्स करेंगे।

    रियल लाइफ में किसी की हिम्मत नहीं कि वजन पर टिप्पणी करे; 'डब्बा कार्टेल' से बदला दायरा

    अंजलि आनंद ने अपनी रीयल लाइफ और रील लाइफ के अंतर को स्पष्ट करते हुए गर्व से कहा कि वे निजी जिंदगी में बेहद मजबूत और स्वाभिमानी महिला हैं:

    • मजबूत व्यक्तित्व: उन्होंने बताया, "असल जिंदगी में मुझे कभी किसी के सामने अपने शरीर को लेकर स्पष्टीकरण देने या स्टैंड लेने की जरूरत नहीं पड़ी। किसी भी इंसान में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह मेरे सामने आकर मेरे वजन पर कोई भद्दी टिप्पणी कर सके। मेरी निजी जिंदगी में लोग मेरे वजन को बाद में देखते हैं, पहले वे मेरे मजबूत और जिंदादिल व्यक्तित्व से प्रभावित होते हैं।"

    • टाइपकास्टिंग के दायरे से निकलीं बाहर: 'रॉकी और रानी…' की अपार सफलता के बाद जब इंडस्ट्री उन्हें फिर से केवल बॉडी शेमिंग आधारित किरदारों में ही फिट करने की कोशिश कर रही थी, तो उन्होंने बेहद समझदारी से काम लिया। अंजलि ने इस रूढ़िवादिता को तोड़ने के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म की चर्चित सीरीज 'डब्बा कार्टेल' और 'रात जवान है' जैसी बिल्कुल अलग तरह की भूमिकाएं चुनीं, जहां उनके अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा (वर्सेटैलिटी) को दर्शकों ने काफी सराहा।

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