नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' भव्य समारोह के आयोजकों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। इस खत के जरिए आयोजकों ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कार्यक्रम में आई भीड़ को 'पेड क्राउड' यानी पैसे देकर बुलाई गई भीड़ कहा गया था। आयोजन समिति ने कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं से अपने विवादित बयान को वापस लेने और भारतीय समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की पुरजोर मांग की है।
'मोदी एयरवेज' और आत्मनिर्भर प्रवासी
यह खुला खत उन प्रवासी स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) की ओर से लिखा गया है, जिन्होंने 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम के लिए सिडनी से मेलबर्न तक 'मोदी एयरवेज' नामक एक विशेष चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था की थी। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस ऐतिहासिक यात्रा या कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के आने-जाने और ठहरने का खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया, न भारत सरकार ने और न ही ऑस्ट्रेलिया सरकार ने। इस फ्लाइट में सफर करने वाले सभी अप्रवासियों ने अपने टिकट और ठहरने का पूरा खर्च खुद अपनी जेब से वहन किया था, जबकि कुछ लोगों की मदद स्थानीय समुदाय ने की थी।
घरेलू राजनीति के चक्कर में प्रवासियों का अपमान
आयोजन टीम के सदस्य अमित कारंत ने इस पूरे मामले पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन जैसे ऑस्ट्रेलिया के दूर-दराज के शहरों से लोग अपनी मर्जी और उत्साह के साथ मेलबर्न पहुंचे थे। इसमें किसी भी राजनीतिक दल या सरकारी संस्था का कोई वित्तीय योगदान नहीं था। खत में जोर देकर कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा इस स्वैच्छिक आयोजन को 'प्रायोजित' बताना वहां रहने वाले हजारों भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की ईमानदारी और उनकी स्वतंत्र सोच का अपमान है। इस विशेष विमान में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, स्थायी निवासी, कामकाजी पेशेवर, उद्योगपति, छात्र और बुजुर्ग शामिल थे, जिन्हें भाड़े की भीड़ कहना प्रवासियों की गरिमा को ठेस पहुंचाना है। पत्र के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का भारतीय समाज किसी एक विचारधारा से नहीं बंधा है; वहां हर दल के समर्थक और राजनीति से दूर रहने वाले लोग भी शामिल हैं।
वॉलंटियर्स की महीनों की मेहनत और तीन बड़ी मांगें
स्वयंसेवकों का कहना है कि इस चार्टर्ड विमान सेवा को धरातल पर उतारने के लिए महीनों की कड़े परिश्रम, कागजी कार्रवाई और यात्रियों से तालमेल की आवश्यकता पड़ी थी। कई प्रवासियों ने अपने व्यापार और परिवारों को छोड़कर दिन-रात इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। इसी कड़ी मेहनत का हवाला देते हुए आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
कांग्रेस सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे कि इस फ्लाइट के लिए बीजेपी या भारत सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया।
जनता को पैसे देकर जुटाने वाले सभी निराधार आरोप तुरंत वापस लिए जाएं।
इस पूरे आयोजन से जुड़े वॉलंटियर्स, यात्रियों और ऑस्ट्रेलिया के समस्त भारतीय समुदाय से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
मार्वल स्टेडियम में उमड़ा था जनसैलाब
9 जुलाई को मेलबर्न के ऐतिहासिक मार्वल स्टेडियम में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में रिकॉर्ड 30 हजार से अधिक लोग जुटे थे। इस दौरान मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया प्रांत की प्रीमियर जैसिंटा एलन भी विशेष रूप से उपस्थित थीं। आयोजकों ने अंत में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को भारत के भीतर विरोध करने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन देश की अंदरूनी राजनीति के लिए सात समंदर पार बैठे भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।


