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    राज ठाकरे का केंद्र पर निशाना, ‘सोनम वांगचुक को मरने के लिए छोड़ा जा रहा है’

    नई दिल्ली:लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 19वां दिन है। लगातार जारी भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। वांगचुक की तेजी से बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली यह सरकार न केवल सोनम वांगचुक के जीवन को खतरे में डाल रही है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक आंदोलनों का भी गला घोंटना चाहती है।

    राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर जताया गहरा दुख, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

    मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक के अनशन को 19 दिन बीत चुके हैं और उनकी सेहत से जुड़ी जो तस्वीरें व खबरें सामने आ रही हैं, वे दिल दहला देने वाली हैं। ठाकरे ने दुख जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने न सिर्फ वांगचुक की, बल्कि देश में बचे-खुचे जन-आंदोलनों की भी बलि देने का पूरा मन बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं और आंदोलनों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है।

    मीडिया की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रभाव पर जताई चिंता

    अपने बयान में राज ठाकरे ने देश की निष्पक्ष संस्थाओं और मीडिया की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं को बिना किसी पक्षपात के काम करना चाहिए था, वे आज पूरी तरह सरकार के प्रभाव में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यधारा के मीडिया के एक बड़े हिस्से पर भी सरकार के पक्ष में माहौल बनाने का आरोप लगाया। ठाकरे ने कहा कि वर्तमान दौर में सरकार से सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाया जा रहा है, जिससे सत्ता के लिए किसी भी जनहित के आंदोलन को कुचलना और प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित करना बेहद आसान हो गया है।

    वांगचुक की मांगों का किया समर्थन, पिछली परीक्षा गड़बड़ियों का दिया हवाला

    राज ठाकरे ने सोनम वांगचुक द्वारा उठाई जा रही मांगों को देशहित में और पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि नीट (NEET) परीक्षा में पूरी पारदर्शिता लाने, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने और इस नाकामी के लिए जिम्मेदार विभागीय मंत्री को पद से हटाने की मांग में कुछ भी अनुचित नहीं है। भाजपा शासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने याद दिलाया कि व्यापमं से लेकर नीट और हालिया शिक्षक भर्ती परीक्षाओं तक, कई प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आ चुकी है, लेकिन सरकार ने कभी भी इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया।

    प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग और मनसे का पूर्ण समर्थन

    लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य का हवाला देते हुए मनसे प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संवेदनशील मामले में व्यक्तिगत रूप से दखल देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस संकट को राजनीति के चश्मे से देखने के बजाय सामाजिक दृष्टिकोण से हल किया जाना चाहिए, तभी दीर्घकालिक सत्ता का असली महत्व साबित होगा। अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है। ठाकरे ने आम जनता से भी आह्वान किया कि वे केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरें, क्योंकि समाज की चुप्पी भविष्य में जनआंदोलनों की आवाज को हमेशा के लिए दबा देगी।

    जून से जारी है नीट धांधली के खिलाफ यह अनशन

    उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक यह अनशन दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के समर्थन में कर रहे हैं। दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठकर मई में हुई नीट परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वांगचुक शुरुआत से ही इस प्रदर्शन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने 27 जून तक कोई कदम नहीं उठाया, तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे। केंद्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बाद उन्होंने 28 जून से अपना अनशन शुरू किया था।

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