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    ग्वालियर में 108 एंबुलेंस सेवा पर बड़ी कार्रवाई, अनियमितताओं पर लगा ₹6.66 लाख का जुर्माना

    ग्वालियर: जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सजग प्रशासन ने 108 एम्बुलेंस सेवाओं में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद एक सख्त और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने एम्बुलेंस का संचालन करने वाली अनुबंधित निजी कंपनी 'जय अंबे इमरजेंसी सेवा' पर 6 लाख 66 हजार 844 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया है। स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी द्वारा किए गए एक आकस्मिक निरीक्षण (औचक जांच) के दौरान 108 सेवा की चार अलग-अलग एम्बुलेंस गाड़ियों में गंभीर कमियां और नियम विरुद्ध अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।

    जांच के घेरे में आईं ये 4 एम्बुलेंस, नंबरों के साथ हुआ कार्रवाई का खुलासा

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डा. एमएस सागर ने इस दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि करते हुए विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि विभाग को लंबे समय से एम्बुलेंस चालकों और पैरामेडिकल स्टाफ के व्यवहार एवं गाड़ियों के रखरखाव को लेकर आम जनता से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को गंभीरता से लेते हुए नोडल अधिकारी ने जमीन पर उतरकर औचक जांच अभियान चलाया। जिन चार विशिष्ट एम्बुलेंस गाड़ियों में नियमों की धज्जियां उड़ती मिलीं और जिन पर यह जुर्माना लगाया गया है, उनके विवरण इस प्रकार हैं:

    • डबरा बीएलएस एम्बुलेंस: वाहन पंजीयन संख्या (एपी-39-डब्ल्यूईसी-3974)

    • डबरा-1 जननी एक्सप्रेस: वाहन पंजीयन संख्या (सीजी-04-एनवी-6456)

    • डबरा-2 जननी एक्सप्रेस: वाहन पंजीयन संख्या (सीजी-04-एनयू-9043)

    • डीएच मुरार-3 जननी एक्सप्रेस: वाहन पंजीयन संख्या (सीजी-04-एनवी-6453)

    डबरा और ग्वालियर ग्रामीण क्षेत्रों में की गई इस सघन जांच की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर तुरंत राज्य स्वास्थ्य संचनालय (भोपाल) भेजी गई थी। इसी जांच रिपोर्ट को आधार मानते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के शीर्ष प्रबंधन ने कंपनी की इस घोर लापरवाही पर इतनी बड़ी राशि का अर्थदंड लगाने का अंतिम आदेश जारी किया।

    मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    • देरी से पहुंचने की आदत पर लगाम: अक्सर देखा गया है कि आपातकालीन समय में 108 या जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचती हैं। एम्बुलेंस कर्मियों की इस ढीली कार्यप्रणाली और तकनीकी खामियों के कारण कई बार गंभीर मरीजों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पाता और वे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

    • भविष्य में भी जारी रहेंगे औचक निरीक्षण: सोशल मीडिया पर भी कई बार इन एम्बुलेंसों में ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी या जरूरी मेडिकल उपकरणों के खराब होने के वीडियो वायरल होते रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता की सेहत और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की छूट किसी भी वेंडर कंपनी को नहीं दी जाएगी। आने वाले दिनों में भी इस तरह की औचक जांचें लगातार जारी रहेंगी ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त रहे।

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