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    15 अगस्त तक “विशेष अभियान”, घर-घर सर्वे, सटीक वृद्धि निगरानी एवं पोषण सेवाओं पर फोकस

    जयपुर: राजस्थान में महिला एवं बाल विकास विभाग ने कुपोषण के खिलाफ जंग और आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए एक बड़े विशेष अभियान की शुरुआत की है। पोषण अभियान 2.0 और सक्षम आंगनबाड़ी के तहत कोई भी जरूरतमंद लाभार्थी सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे, इसके लिए 1 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक राज्यव्यापी विशेष मुहिम चलाई जा रही है। समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) के निदेशक श्री वासुदेव मालावत ने जानकारी दी कि इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की शासन सचिव श्रीमती पूनम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी अधिकारियों को कड़े और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य आंगनबाड़ी क्षेत्रों के शत-प्रतिशत परिवारों का सर्वे करना, पात्र लाभार्थियों का 'पोषण ट्रैकर' पोर्टल पर पंजीकरण करना और बच्चों के स्वास्थ्य व शारीरिक विकास पर पैनी नजर रखना है।

    हर घर तक पहुंचेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, तैयार होगा नजरी नक्शा

    अभियान के पहले और सबसे महत्वपूर्ण चरण के रूप में राज्यभर में घर-घर सर्वे का कार्य शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने आवंटित क्षेत्र का एक 'नजरी नक्शा' (भौगोलिक मानचित्र) तैयार करेंगी, ताकि कोई भी गली, मोहल्ला या ढाणी छूटने न पाए। इस योजनाबद्ध सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र का कोई भी परिवार, पुरुष, महिला, किशोरी या नवजात शिशु विभागीय सेवाओं और डेटा रिकॉर्ड से बाहर न रह जाए।

    बच्चों के शारीरिक विकास की सटीक निगरानी और रैंडम क्रॉस-वेरिफिकेशन

    शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अभियान के दौरान शून्य से छह वर्ष तक के सभी बच्चों के शारीरिक विकास की सटीक मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके तहत बच्चों के वजन, लंबाई और ऊंचाई का बिल्कुल सही माप लेकर उसे तुरंत 'पोषण ट्रैकर' ऐप पर दर्ज किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने के लिए महिला पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर्स) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर कम से कम 10 बच्चों के शारीरिक माप का रैंडमली (अचानक) सत्यापन करेंगी, जिससे आंकड़ों की शुद्धता बनी रहे।

    पोषण ट्रैकर पर पंजीकरण और विभागीय डेटा का अपग्रेडेशन

    डेटा को पूरी तरह पारदर्शी और अपडेटेड बनाने के लिए गर्भवती महिलाओं, धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं, छह साल तक के बच्चों और स्कूल न जाने वाली किशोरियों का नए सिरे से पंजीकरण व सत्यापन किया जा रहा है। इसके साथ ही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की प्रोफाइल अपडेट करने, केंद्रों पर उपलब्ध पेयजल व शौचालय जैसी आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा करने तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) व विभिन्न कल्याणकारी बीमा योजनाओं के लंबित फॉर्मों को तुरंत पूरा करने का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है।

    सामुदायिक बैठकों के जरिए जन-कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार

    ग्रामीण और शहरी अंचलों में जागरूकता फैलाने के लिए सामुदायिक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों के माध्यम से आमजन को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना, मुख्यमंत्री मातृ पोषण योजना, वन स्टॉप सेंटर और महिला सुरक्षा सलाह केंद्रों के बारे में विस्तार से जागरूक किया जा रहा है। साथ ही, गंभीर रूप से अतिकुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए दिए जाने वाले पौष्टिक 'दूधयुक्त बालाहार' की उपयोगिता के बारे में भी परिवारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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