लखनऊ। जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन स्थल से हटाए जाने और उनके अस्पताल में भर्ती होने के घटनाक्रम ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा की दमनकारी राजनीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने इस कार्रवाई को भाजपा की संवादहीनता और नकारात्मक विचारधारा का परिणाम बताया है।
अखिलेश यादव की मांग और तीखी टिप्पणी
सपा अध्यक्ष ने घटनाक्रम पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा का गांधीवादी तरीकों और शांतिपूर्ण संवाद में कोई विश्वास नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अनशन स्थल पर सादी वर्दी में पहुँचकर कार्रवाई करने वालों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। सपा प्रमुख ने मांग की है कि सोनम वांगचुक का उपचार किसी सरकारी तंत्र के बजाय 'न्यायिक निगरानी' में होना चाहिए, ताकि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का संदेह न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार का यह कदम देश और विदेश में संदेह के घेरे में है।
डिंपल यादव का भाजपा पर कड़ा प्रहार
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भाजपा सरकार शांतिपूर्ण आवाजों को दबाकर संविधान और लोकतंत्र को आहत कर रही है। उन्होंने भाजपा की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए इसे 'देश के लिए सफेद चादर का कफन' जैसा घातक करार दिया है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने का प्रयास करना देश के मूल्यों के विरुद्ध है।
डिजिटल एकता और भाजपा का भय
अखिलेश यादव ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि भाजपा की सोच हमेशा से 'दरारवादी' रही है। उन्होंने दावा किया कि जहाँ कहीं भी एकता, सौहार्द और एकजुटता दिखाई देती है, भाजपा घबराकर प्रतिक्रियावादी कदम उठाती है और आंदोलनों को तितर-बितर करने का प्रयास करती है। सपा अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भाजपा इस वास्तविकता को नजरअंदाज कर रही है कि आज की नई पीढ़ी 'डिजिटल यूनिटी' के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में पूरी तरह सक्षम है और भाजपा की ये दमनकारी नीतियां इस क्रांति को रोकने में विफल रहेंगी।


