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    UP BJP उपाध्यक्ष पूजा पाल ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना, लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप

    लखनऊ हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई की उपाध्यक्ष नियुक्त की गईं कौशांबी के चायल से विधायक पूजा पाल अब सियासी मैदान में काफी आक्रामक नजर आ रही हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद से ही वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर खासी सक्रिय हैं और लगातार विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखे शब्दबाण चला रही हैं।

    समाजवादी पार्टी से मोहभंग और भाजपा में नई शुरुआत

    बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राजनीति से निकलकर समाजवादी पार्टी के साथ एक संक्षिप्त सफर तय करने वाली पूजा पाल का भाजपा में आना उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। शनिवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी से अपने अलगाव और भाजपा में शामिल होने के कारणों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधाराओं के मेल न खाने और राजनीतिक उपेक्षा के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।

    अखिलेश यादव पर सीधा निशाना

    पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए पुरानी कड़वाहट को सार्वजनिक किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मैंने जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया, तो समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए मुझे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।" उन्होंने आरोप लगाया कि सपा में विपक्ष की आवाज को दबाया जाता है और सकारात्मक राजनीति की जगह केवल विरोध के लिए विरोध किया जाता है।

    आक्रामक रुख के मायने

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूजा पाल की सक्रियता और उनका आक्रामक तेवर आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। उपाध्यक्ष पद मिलने के बाद वे न केवल कौशांबी में बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी दलित और पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही हैं। वे लगातार सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का दावा कर रही हैं और विपक्ष के हर आरोप का सोशल मीडिया के माध्यम से करारा जवाब दे रही हैं।

    विपक्ष की प्रतिक्रिया और भविष्य की राजनीति

    पूजा पाल द्वारा समाजवादी पार्टी पर लगातार हो रहे हमलों के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सपा नेताओं ने भी उन पर 'सत्ता की मलाई' खाने का आरोप लगाया है। बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की नई उपाध्यक्ष के रूप में उनकी यह आक्रामक छवि आने वाले चुनावों में पार्टी को कितनी मजबूती दिला पाती है। फिलहाल, लखनऊ के गलियारों में उनके इस नए राजनीतिक अवतार की चर्चा जोरों पर है।

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