More
    Homeदेशदिल का दौरा पड़ने के बाद भी 12 घंटे Uber चला रहा...

    दिल का दौरा पड़ने के बाद भी 12 घंटे Uber चला रहा बिहारी शख्स

    नई दिल्ली: राजधानी की सड़कों पर एक उबर ड्राइवर की प्रेरणादायक कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस ड्राइवर के पास आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य और हर महीने होने वाली निश्चित आय का बड़ा जरिया होने के बावजूद, उन्होंने घर बैठकर आराम करने के बजाय काम करते रहने का कठिन रास्ता चुना है। एक कंटेंट क्रिएटर आस्था सेठ द्वारा साझा की गई यह दास्तान न केवल एक व्यक्ति के कड़े संघर्ष को बयां करती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि जीवन में स्वाभिमान और खुद को सक्रिय रखने की इच्छाशक्ति किसी भी बड़ी बीमारी से कहीं अधिक मजबूत होती है।

    फैक्ट्री से निकाला जाना और दिल का दौरा पड़ने का दर्द

    बिहार के समस्तीपुर जिले के मूल निवासी यह ड्राइवर पहले दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार की फैक्ट्री में कार्यरत थे और वहां बेहतर जीवन यापन कर रहे थे। हालांकि, बीते वर्ष उन्हें अचानक आए दिल के दौरे (हार्ट अटैक) ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। बीमारी के बाद, उनके रिश्तेदार ने यह मान लिया कि अब वे शारीरिक मेहनत वाला काम करने में सक्षम नहीं रहे और उन्हें फैक्ट्री से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उस समय उन्हें न केवल अपने स्वास्थ्य से जूझना पड़ा, बल्कि अपने ही किसी करीबी द्वारा यह सुनने का मानसिक आघात भी सहना पड़ा कि अब वे "किसी काम के नहीं" रहे।

    लाखों की पैसिव इनकम के बावजूद चुना कड़ी मेहनत का मार्ग

    इस ड्राइवर की वित्तीय स्थिति का सच जानकर हर कोई दंग रह जाता है। उनके पास नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के समीप एक आवासीय सोसाइटी में दो फ्लैट हैं, जिनकी कुल बाजार कीमत लगभग 80 लाख रुपये है। इन संपत्तियों से उन्हें प्रतिमाह 80,000 रुपये का किराया मिलता है, जो एक आरामदायक जीवन जीने के लिए पर्याप्त है। बिहार में उनकी पुश्तैनी संपत्ति भी मौजूद है। इन सबके बावजूद, उन्होंने घर पर आराम करने के बजाय सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक उबर गाड़ी चलाने का चुनौतीपूर्ण विकल्प चुना है, जिससे वे हर महीने 50,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई भी कर लेते हैं।

    खुद को साबित करने का जज्बा और बेटियों के लिए सुरक्षित भविष्य

    ड्राइवर के इस निरंतर काम करने के पीछे का उद्देश्य केवल धनोपार्जन नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की लड़ाई है। वे इस मेहनत के जरिए उन लोगों को यह कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या उन्हें अक्षम या "बेकार" नहीं बना सकती। उनका मानना है कि काम करना ही उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ और मजबूत रखता है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने इन दो फ्लैटों को अपनी दो बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुरक्षित रखा है, ताकि उनके न रहने पर भी उनके परिवार को किसी प्रकार की कमी न झेलनी पड़े।

    सकारात्मक सोच और जिजीविषा से भरा एक प्रेरक उदाहरण

    सोशल मीडिया पर जब यह कहानी साझा की गई, तो लाखों लोगों ने ड्राइवर के इस साहस को सलाम किया। एक समय था जब उन्हें यह कहकर नौकरी से निकाल दिया गया था कि वे शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके हैं, लेकिन आज वे अपनी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति से न केवल अपनी कमाई का जरिया बनाए हुए हैं, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा के स्रोत भी बने हैं। उनकी यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यदि मनुष्य का संकल्प दृढ़ हो, तो वह समाज और अपनों की नजरों में फिर से अपना सम्मान हासिल कर सकता है और जीवन में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सकता है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here