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    कैंची से घायल बच्चे की जान पर बनी आफत, डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी से बचाया

    ग्वालियर: सही समय पर लिए गए सटीक फैसले इंसान की जिंदगी बचा सकते हैं, और इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण मुरैना जिले के जौरा क्षेत्र में देखने को मिला। यहाँ खेलते समय एक आठ वर्षीय बालक के सिर में नुकीली कैंची काफी गहराई तक धंस गई। परिजनों ने इस भयावह स्थिति में धैर्य बनाए रखा और कैंची को स्वयं निकालने की गलती न करते हुए तुरंत बालक को ग्वालियर स्थित गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) ले आए। परिजनों का यही त्वरित और समझदारी भरा फैसला बच्चे के लिए जीवनदान साबित हुआ।

    जटिल न्यूरोसर्जरी से सुरक्षित निकाली गई कैंची

    जीआरएमसी पहुँचते ही न्यूरोसर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तत्काल सक्रिय हो गई। प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा और प्रो. डॉ. अवधेश शुक्ला के मार्गदर्शन में डॉ. विवेक कनकने एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की टीम ने इस अति-जोखिम भरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाली। उन्नत माइक्रो-न्यूरोसर्जिकल तकनीकों का उपयोग करते हुए डॉक्टरों ने मस्तिष्क को क्षति पहुँचाए बिना कैंची को बाहर निकाला और क्षतिग्रस्त दिमागी ऊतकों का तुरंत उपचार किया। सफल ऑपरेशन के बाद बालक अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।

    आपात स्थिति में न करें कैंची या नुकीली चीज खींचने की भूल

    विश्व मस्तिष्क दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. शर्मा ने बताया कि शरीर या सिर में धंसी कोई भी नुकीली वस्तु प्राकृतिक रूप से अत्यधिक रक्तस्राव को रोके रखती है। यदि उसे बिना चिकित्सा विशेषज्ञ की मौजूदगी के बाहर खींच लिया जाए, तो तेज ब्लीडिंग के कारण मरीज की जान जा सकती है। उन्होंने सलाह दी कि ऐसी घटनाओं के वक्त घबराने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी बड़े मेडिकल सेंटर पहुँचाना चाहिए।

    मध्य भारत में जटिल न्यूरो इलाज का प्रमुख केंद्र

    जीआरएमसी का न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विभाग अब गंभीर दिमागी रोगों के इलाज के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभरा है। यहाँ हर महीने 500 से अधिक मरीज ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, हेड इंजरी और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर समस्याओं का इलाज कराने पहुँचते हैं। विभाग में प्रतिमाह औसतन 200 जटिल सर्जरी सफलता से की जा रही हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के 15 से अधिक जिलों के साथ-साथ राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी लोग भरोसे के साथ यहाँ आ रहे हैं।

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