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    अभिषेक बनर्जी ने की राहुल गांधी से भेंट, डेरेक ओ’ब्रायन के साथ हुई बैठक

    कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक एकछत्र राज करने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे कठिन और संवेदनशील दौर से गुजर रही है। हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की जो चिंगारी सुलग रही थी, वह अब एक बड़ी राजनीतिक बगावत के रूप में खुलकर सामने आ गई है। टीएमसी के कई वरिष्ठ विधायकों और करीब 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मच गया है।

    टीएमसी में ऐतिहासिक बगावत और एनडीए को समर्थन

    पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच टीएमसी के करीब 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। इन सांसदों ने दल-बदल कानून से बचने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार करने का दावा करते हुए खुद को एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि ये बागी नेता बहुत जल्द औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं, जिससे संसद में मोदी सरकार की ताकत और अधिक बढ़ जाएगी।

    अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की दिल्ली में मुलाकात

    पार्टी को इस अभूतपूर्व बिखराव से बचाने और इस भीषण राजनीतिक संकट का हल निकालने के लिए ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली का रुख किया है। अभिषेक बनर्जी ने नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों नेताओं के बीच पश्चिम बंगाल के ताजा राजनीतिक हालात, पार्टी के भीतर मची बगावत और विपक्षी एकजुटता को बनाए रखने को लेकर बेहद गंभीर और लंबी चर्चा हुई।

    क्या कांग्रेस में होगा टीएमसी का विलय?

    अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की इस अचानक हुई मुलाकात के बाद देश के सियासी हलकों में यह अफवाहें और अटकलें बेहद तेज हो गई हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस कानूनी और तकनीकी अयोग्यताओं से बचने के लिए कांग्रेस में अपना विलय कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के बागी धड़े को रोकने में ममता बनर्जी असमर्थ रहती हैं, तो विपक्षी खेमे में अपनी प्रासंगिकता और वजूद बचाए रखने के लिए टीएमसी कांग्रेस के साथ किसी बड़े सांगठनिक समझौते या विलय की दिशा में आगे बढ़ सकती है। हालांकि, दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से विलय की खबरों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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