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    लाडकी बहीण योजना में गड़बड़ी करने वालों पर गिरी गाज, सरकार ने वापस मांगे पैसे

    महाराष्ट्र सरकार ने गरीब महिलाओं के लिए लाडकी बहीण योजना की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की मदद करना था. हालांकि इस योजना का लाभ कुछ ऐसी महिलाओं ने लिया है, जो सरकारी नौकरी कर रही थीं. अब इसको लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है. महाराष्ट्र सरकार ने लाडकी बहीण योजना में हेराफेरी पर सरकारी महिला कर्मचारियों से सरकारी योजना के पैसे वापस लेने का निर्णय लिया है.

    सरकार ने इन महिलाओं पर सरकारी योजना का दुरुपयोग माना गया है और सरकार ने अब ऐसी सरकारी महिला कर्मचारियों को चिन्हित किया है. जिन्होंने सरकारी पद पर रहते हुए गरीब महिलाओं की इस योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये प्राप्त किये हैं.

    महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस बारे में साफ कहा है कि सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को लाडकी बहीण योजना का लाभ नहीं लेना चाहिए था. अब उनसे वसूली जरूर की जाएगी. वहीं कई सरकारी विभागों ने वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है, अन्य विभागों को भी जल्द निर्देश दिए जाएंगे.

    केवल ये महिलाएं ले सकती हैं लाभ
    लाडकी बहीण योजना गरीब महिलाओं की मदद के लिए शुरू की गई थी. पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की वित्तीय सहायता मिलती है. योजना का लक्ष्य: महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, स्वास्थ्य व पोषण में सुधार करना है. इस योजना में पात्रता की जो शर्तें है उसके मुताबिक महिला की उम्र: 21 से 65 वर्ष होनी चाहिए. आय सीमा: वार्षिक पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से कम होना चाहिए. विवाहित, अविवाहित, तलाकशुदा, विधवा, परित्यक्त, निराश्रित महिलाएं इस योजना की पात्र हैं.

    महिलाओं से वसूली जाएगी राशि
    इस योजना की बड़ी शर्त ये है की लाभार्थी महिला सरकारी कर्मचारी नहीं होनी चाहिए (क्योंकि इनकी आय सीमा पात्रता से अधिक है) लाड़की बहिन योजना के लाभार्थियों को लेकर जो जांच चल रही है. उसमें सामने आया है कि अब तक 2,652 महिला सरकारी कर्मचारियों ने अवैध रूप से इस योजना का लाभ लिया. इन कर्मचारियों से ₹3.58 करोड़ की वसूली की जाएगी. ये महिलाएं अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच लाभ प्राप्त करती रहीं हैं. हर महिला ने अब तक करीब ₹13,500 का लाभ लिया है.

    कैसे सामने आया पूरा भ्रष्टाचार
    महाराष्ट्र के सामान्य प्रशासन विभाग ने कर्मचारियों का डेटा IT विभाग और UID (आधार) आधारित सत्यापन से जांच किया था. अब तक 1.2 लाख कर्मचारियों की जांच हो चुकी है, जिसमे 2656 सरकारी महिला कर्मचारी फर्जी लाभार्थी पाई गई है जबकि शेष 6 लाख महिला कर्मचारियों की जांच और सत्यापन बाकी है.

    वही दूसरी तरफ राज्य सरकार ने 7.7 लाख ऐसी महिलाओं के भुगतान रोक दिए हैं, जो दो योजनाओं (लाडकी बहीण व नमो शेतकरी) का एक साथ लाभ ले रही थीं. आने वाले समय में ये आंकड़ा और बढ़ेगा. डिफॉल्टर कर्मचारियों को स्वेच्छा से राशि लौटाने की अपील की गई है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. सरकार ने इसे गंभीर सेवा आचरण उल्लंघन माना जा रहा है.

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