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    स्वर्ण जयंती कार्यों का विराम नहीं अनुभव का विस्तार ;राजेंद्र सिंह

    भीकमपुरा (राजस्थान) जल संरक्षण और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में कार्यरत संगठन तरुण भारत संघ (तभासं) ने अपने 50 वर्षों की उपलब्धियों को “स्वर्ण जयंती उत्सव” के रूप में मनाया। राजस्थान के अलवर जिले स्थित तरुण आश्रम, भीकमपुरा में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों से आए 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह
    समारोह में ‘निसर्ग आणि माणूस’ (संपादन: श्रीराम पवार, लेखन: राजेन्द्र सिंह) और ‘बागी से किसानी’ (लेखक: राजेश रवि) पुस्तकों का विमोचन किया गया।
    तभासं के प्रभावशाली कार्यों से जुड़े 110 सामाजिक कार्यकर्ताओं को विभिन्न सम्मानों — जैसे नदी नायक, कर्म-भूषण, नव-दीप आदि — से सम्मानित किया गया।

    राजेन्द्र सिंह ने साझा किए अनुभव
    तभासं के संस्थापक और ‘जल पुरुष’ राजेन्द्र सिंह ने कहा, “30 मई 1975 को हमें पंजीकरण मिला था, जो अब स्थापना दिवस बन गया है। यह संस्था आग, सूखा और बाढ़ से शुरू हुई, लेकिन आज यह एक अंतरराष्ट्रीय जल आंदोलन का चेहरा बन चुकी है।”

    उन्होंने आगे कहा, “यह 50 वर्षों की यात्रा उस रेल जैसी है, जिसमें कई मुसाफिर आए, कुछ जल्दी उतर गए और कुछ आज भी सफर में साथ हैं। अब यह यात्रा नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगी।”

    चंबल से वैश्विक मंच तक
    तभासं ने बीते पांच दशकों में राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में काम किया है। इसके प्रयासों से हजारों जोहड़ बने, लुप्त नदियाँ पुनर्जीवित हुईं, और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को जीवन मिला।

    1991 में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के माध्यम से सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र की 465 अवैध खदानें बंद कराई गईं। 1994 में इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार, 2015 में स्टॉकहोम वॉटर प्राइज, और हाल ही में तभासं का “अर्थना अवार्ड” के लिए फाइनलिस्ट चुना जाना इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।

     

    डाकुओं से किसान तक: चंबल का बदलाव
    2023 में, चंबल घाटी में तभासं के प्रयासों से 1000 पूर्व डकैतों ने हथियार छोड़ खेती और जल संरक्षण का रास्ता अपनाया। यह केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी बेमिसाल उदाहरण है।

    भविष्य की दिशा
    तभासं के निदेशक मौलिक सिसोदिया ने संगठन की यात्रा और उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा, “जलवायु संकट से निपटने में समुदाय आधारित समाधान ही सबसे प्रभावी मॉडल हैं। तरुण भारत संघ इस दिशा में कार्यरत है और आगे भी रहेगा।”

    समापन में संकल्प
    राजेन्द्र सिंह ने समारोह के अंत में कहा, “स्वर्ण जयंती किसी विराम का नहीं, बल्कि अनुभवों के विस्तार का प्रतीक है। यह नई यात्राओं की शुरुआत है, जहां सामूहिक चेतना और जल संरक्षण मिलकर भविष्य को जल-सुरक्षित बनाएंगे।”

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